देखिये-यूपी मे बुन्देली कंठ पानी की तलाश मे कैसे भटक रहे?
लखनउ 8 मईः कलम, कला और कृपाण की बुन्देली धरती इन दिनो किसी काम की नहीं रह गयी। अपनी प्यास बुझाने की आस मे सांसे टूटती नजर आ रही है। रहनुमा पत्थर दिल हो गये हैं। पता नहीं, किसी माननीय का दिल कब पसीजेगा? कब प्यास बुझेगी? अभी तो पथ पर चलते पैर पानी की…
