*PM मोदी का 10 मिनट इंतजार करते रहे पुतिन, फिर कार में साथ सफर… चीन में दिखी दोस्ती की मजबूत बुनियाद*
*मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मुलाकात का दिखने लगा असर, अमेरिका के होश आए ठिकाने, भारत से दोस्ती की देने लगा दुहाई*
*नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने भारत से दोस्ती दिखाते हुए लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है.*
* ‘भारत-अमेरिका की साझेदारी 21वीं सदी का परिभाषित रिश्ता है. यह साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयां छू रही है और इसका आधार हमारे दोनों देशों की जनता की स्थायी मित्रता है.’
* *अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बयान जारी कर कहा कि* ‘भारत और अमेरिका की जनता के बीच की यह गहरी दोस्ती हमारी साझेदारी की नींव है. यही हमें आगे बढ़ाती है और हमारी आर्थिक साझेदारी की अपार संभावनाओं को साकार करती है.’
*SCO समिट में मोदी-पुतिन-जिनपिंग के बीच जिस तरह के सकारात्मक संदेश सामने आए हैं, उसने अमेरिका पर दबाव बढ़ा दिया है.*
■ रूस-चीन के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी से वॉशिंगटन को यह एहसास हो गया है कि अगर वह एशिया में अपने हित सुरक्षित रखना चाहता है, तो उसे भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने होंगे.
■ दरअसल, हाल ही में व्हाइट हाउस ने भारत के रूस से तेल खरीदने पर कई तीखी टिप्पणियां की थीं. लेकिन अब SCO समिट से आई तस्वीरों ने समीकरण बदल दिए हैं. यही वजह है कि अमेरिका अब भारत-अमेरिका संबंधों को “21वीं सदी की परिभाषित साझेदारी” कहने पर मजबूर हो गया है.
■ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा कई मायनों में खास रही। प्रधानमंत्री मोदी की आठ साल बाद हुई चीन यात्रा में उनकी शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन से लंबी और अहम मुलाकातें हुईं। पीएम मोदी की राष्ट्रपति पुतिन के साथ तो कार में भी लगभग 45 मिनट तक बातचीत चली।
■ चीन में एससीओ समिट का आयोजन हो रहा है. दुनिया की महाशक्तियां इस वक्त तियानजिन शहर में जमा हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को एससीओ के मंच पर एक साथ नजर आए. तीनों को अनौपचारिक रूप से बातचीत करते देखा गया. इस दौरान एक और बड़ा दिलचस्प नजारा दिखा.
*पाकिस्तान भी एससीओ का हिस्सा है इसलिए पाक पीएम शहबाज शरीफ भी इस सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे हैं. सोमवार को समिट के दूसरे दिन एक वक्त ऐसा आया जब पीएम मोदी और पुतिन एक-दूसरे से बात करते हुए हॉल से गुजर रहे थे. इस दौरान शहबाज शरीफ कोने में हाथ बांधे अलग-थलग खड़े दिखाई दिए. न ही कोई उनसे बात कर रहा था और न ही कोई तवज्जो दे रहा था. वो प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन को हरसत भरी निगाहों से बस देखते रह गए.*
