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झाँसी का इतिहास है वीर गाथाओं से परिपूर्ण- डॉ० संदीप सरावगी

झाँसी के वास्तविक इतिहास से विद्यार्थी हैं अनभिज्ञ- सुरेंद्र सक्सेना

जनपद के हजारों विद्यार्थियों के समक्ष संघर्ष सेवा समिति प्रस्तुत करेगी झाँसी का इतिहास

झाँसी। झाँसी का इतिहास प्रथम स्वाधीनता संग्राम के लिए विश्व भर में पढ़ा जाता है महारानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथाओं से झाँसी विश्व भर में प्रसिद्ध है। डॉ० सुरेंद्र नारायण सक्सेना सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर व हिंदी के विभागाध्यक्ष रहे हैं ने भारतीय इतिहास से संबंधित कई पुस्तकों का संपादन किया है साथ ही उन्होंने प्रथम स्वाधीनता संग्राम से संबंधित शोध पत्र वाचन एवं तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता भी की है उन्होंने झाँसी का इतिहास कविताओं एवं विभिन्न पुस्तकों की संग्रह से देश के समक्ष प्रस्तुत किया है। उन्होंने मोहे तो मोरे कविताम्त बनावट पुस्तक में झाँसी एवं बुंदेलखंड से संबंधित 7 कविताओं की रचना की है। जिसका विमोचन दिनांक 24/05/2023 को संघर्ष सेवा समिति कार्यालय में संस्था के अध्यक्ष डॉ० संदीप सरावगी द्वारा किया गया। इस दौरान डॉ० सुरेंद्र ने झाँसी के इतिहास से संबंधित विभिन्न घटनाओं के बारे में विस्तार से बताया उनके कविता संग्रह में झाँसी की भौगोलिक स्थिति एवं धार्मिक स्थलों का बारीकी से विवरण किया गया है। डॉ० सुरेंद्र अब झाँसी के इतिहास पर एक और पुस्तक लिख रहे हैं जिसका संपादन एवं विमोचन आगामी माह में किया जाएगा डॉ० सुरेंद्र ने कहा संघर्ष सेवा समिति समाज सेवा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य कर रही है आज मैं डॉक्टर संदीप को झाँसी की समस्त जनता को वास्तविक इतिहास से परिचित कराने की जिम्मेदारी सौंप रहा हूं। इस अवसर पर समाजसेवी डॉ० संदीप ने कहा झाँसी का इतिहास वीर गाथाओं से परिपूर्ण है प्रथम स्वाधीनता संग्राम की दीपशिखा महारानी लक्ष्मी बाई ने स्वतंत्रता के लिए जो बलिदान किया वह अपने आप में अद्वितीय उदाहरण है। जिस समय महिलाओं को समाज में समानता का अधिकार नहीं था उस समय रानी लक्ष्मीबाई ने अपने युद्ध कौशल से किस प्रकार अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे यह हम सभी जानते हैं। हमारी संस्था संघर्ष सेवा समिति आने वाले शिक्षण सत्र में झाँसी के इतिहास के संबंधित रचनाओं को प्रत्येक विद्यालय में वितरित करने का कार्य करेगी। इसके लिए संघर्ष सेवा समिति हजारों की संख्या में इस पुस्तक की प्रतियां प्रकाशित कराने जा रही है जिससे छात्र छात्राओं और जनमानस को झाँसी के वास्तविक इतिहास का बोध हो सके। इस दौरान संघर्ष सेवा समिति से नीलू रायकवार, बसंत गुप्ता, सुशांत गेड़ा, पूजा रायकवार, राकेश अहिरवार, राजू सेन, संदीप नामदेव, महेंद्र रायकवार, उर्वशी अवस्थी, जीतू देवानंद, रिजवान खान आदि उपस्थित रहे।

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