– भक्तमाल कथा का हुआ शुभांरभ, अधिक संख्या में उमड़े भक्त
झांसी। जहां संतो की सेवा होती है, वहां भगवान का वास होता है। लोगों को चाहिये कि वे संतो की सेवा में हमेशा लीन रहें। जिस प्रकार गर्भवती स्त्री के गर्भ को पुष्ट करने के लिये हम सभी उसकी सेवा, उसके खानपान पर विशेष ध्यान देते है, ठीक उसी प्रकार संत अपने अंदर प्रभु को धारण करते है, इसलिये लोगों को अपने कल्याण के लिये संतो की सेवा अवश्य करनी चाहिये। उक्त विचार वृन्दावन धाम से पधारे श्री श्री 1008 श्री महंत मदन मोहन दास ने रखे।
रविवार को आंतिया तालाब के निकट स्थित श्री मेहंदी बाग सरकार के प्रकाट्य उत्सव के उपलक्ष्य में श्री राम जानकी मंदिर मेहंदी बाग में भक्तमाल का आयोजन महंत श्री महंत राम प्रिय दास के सानिध्य में शुरू हो गया । कथा का वाचन करते हुये महंत श्री महंत मदन मोहन दास ने कहा कि भगवान की सेवा और संतो की सेवा भगवान की इच्छा पर ही निर्भर होती है, बड़े –बड़े लोग चाहते है कि वे भक्तिरस में डूबे, लेकिन भक्ति आनंद भी उन्ही को प्राप्त होता है जो मन में अच्छा भाव रखते है। ठाकुर जी को भक्त का भाव ही अपना बना लेता है।
कथा श्रवण के तीन अंग है, श्रवण, मनन और चिंतन। सभी भक्तों को चाहिये कि वे हमेशा कथा का अच्छे ढंग से श्रवण , चिंतन और मनन करें। भक्तमाल कथा के मुख्य स्त्रोता स्वयं प्रभु हरि भगवान विष्णु हैं। भक्तमाल कथा का शुभांरभ मंहत श्री रामप्रिय दास महाराज ने पूजन कर किया। इस दौरान मंहत प्रेम नरायण, जगन्नाथदास, गोस्वामी महाराज, अनिल अड़जारिया, गौरीशंकर दुबे, प्रेमप्रकाश सीए, गोविंद सिंह, हेतराम, राकेश तिवारी समेत अधिक संख्या में श्रृद्वालु उपस्थित रहे। आभार विहिप महामंत्री अंचल अड़जारिया ने व्यक्त किया।
