झाँसी स्टेशन का वाहन ठेका आखिर किस नियम से चल रहा?

झांसी झांसी स्टेशन पर वाहन स्टैंड को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं है। सवालों के घेरे में आए इस स्टैंड का मानक और  संचालन अच्छे-अच्छे बुद्धिजीवियों की बुद्धि को हिलाकर रख रहा है।  यहां आने वाले वाहन चालक वाहन को रखने का शुल्क देते  हैं तो  सर्दी में पसीना छूट जाता है।  यहां वाहन खड़े करने केजो  नियम लागू है वह शायद ही हिंदुस्तान के किसी दूसरे शहर में नजर आएंगे

वैसे आपको बता दें कि आज से कुछ महीने पहले यह ठेका संचालित नहीं होता था , लेकिन जब इसके संचालन का स्वरूप सामने आया तो सभी हैरान रह गए।  आरोप यह है कि गुंडई इसके पर्दे के पीछे साफ नजर आती है ।

वाहन को स्टेशन परिसर में प्रवेश करने के साथ ही पैसा देना हर आदमी की मजबूरी बन जाता है । अपने हिसाब से तय किए गए नियमों को सरकारी ठेके में कैसे शामिल किया गया इस बात को लेकर कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं है । सरकारी स्तर पर जब भी इस मामले को लेकर बात की जाती है तो कोई भी अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं होता है ।

आम जनता सोशल मीडिया पर वाहन खड़े करने के लिए की जा रही है इस मनमानी को जाहिर करती है । सोशल मीडिया पर राजा गहोई नामक एक व्यापारी में अपनी पीड़ा को जाहिर भी किया है।

ताज्जुब तो इस बात का है कि  जनता के इतने परेशान होने के बाद भी  कोई भी राजनीतिक  संगठन  या नेता,  सामाजिक संगठन  इस आवाज को  रेलवे तक  नहीं पहुंचा रहे हैं।   बेचारी झांसी की जनता  इस स्टैंड से  वसूले जा रहे  मनमाने किराए को देने पर मजबूर है।

सवाल यह है कि क्या ठेका द्वारा लिया जा रहा शुल्क सही है या गलत इस बात को लेकर अधिकारी सार्वजनिक रूप से से कुछ कह सकेंगे?

 

 

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