झांसी। नगरा में रहने वाले ज्ञान सिंह गुर्जर झांसी से साइकिल यात्रा करते हुए सबसे ऊंचे पर्वत एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंच गए। बेस कैंप की ऊंचाई 5364 मीटर है।
ज्ञान सिंह ने इस यात्रा से झांसी का नाम रोशन किया है। वो अपने जुनून के चलते इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उनके इस सफर को लेकर परिवार में खुशी का माहौल है।
एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक
बहुत ही भावुक और प्रेरणादायक विषय है
मैं आपके पूरे सफर को समेटते हुए एक मजबूत और दिल छूने वाली कविता लिख रहा हूँ:
🚩 “हौसलों का हिमालय” 🚩
56 साल की उम्र में भी दिल जवान रहा,
हर कदम पर बस एक ही अरमान रहा।
ना थकान रुकी, ना हालात झुके,
सपनों का सफर ही मेरी पहचान रहा।
1600 किलोमीटर साइकिल चलाकर निकला था,
झांसी से हिमालय तक इरादा पक्का था।
धूप, बारिश, ठंडी हवाओं का वार सहा,
हर मुश्किल को मैंने हंसकर ही रखा।
8 दिनों में बर्फीली राहें पार की,
ठंड में भी हिम्मत ने हार नहीं मानी।
ऊँचाइयों पर सांसें भले ही कम थीं,
पर हौसलों ने कभी कमी नहीं जानी।
परिवार से दूर रहकर कदम बढ़ाए,
दिल में उनके ही चेहरे हर पल आए।
पत्नी और बच्चों का साथ बना ताकत,
उनके विश्वास ने ही ये रास्ते दिखाए।
गुरुजी की शुभकामनाएं साथ रहीं,
प्रार्थनाओं की छाया हर रात रहीं।
बुजुर्गों के आशीर्वाद ने थामे रखा,
हर मुश्किल में राहें आसान रहीं।
स्वर्गीय माता-पिता का आशीष मिला,
ऊपर से जैसे कोई हाथ थामे चला।
उनकी सीख और संस्कार ही थे,
जिनसे हर डर का अंधेरा ढला।
दोस्त, अपने, सभी शुभचिंतकों की दुआएं,
हर कदम पर बनकर साथ आईं हवाएं।
अकेला नहीं था मैं इस सफर में कभी,
हर दिल की ताकत मेरे संग मुस्कुराए।
एवरेस्ट की गोद में जब कदम रखा,
तो लगा खुद से ही एक वादा पूरा हुआ।
ये जीत सिर्फ मेरी नहीं है दोस्तों,
हर उस दिल का सपना साकार हुआ।
जब हौसले बुलंद हों, तो उम्र नहीं रुकती,
और जब आशीर्वाद साथ हो, तो दुनिया भी झुकती। 🙏
मार्केट संवाद उनकी इस मेहनत और सफलता के लिए शुभकामनाएं देता है।
