झांसी। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन तय हो गया है ।यूपी में दो लड़के यानी अखिलेश यादव और राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव में गठबंधन अपनी दमदारी दिखाएगा।
इधर, गठबंधन फाइनल होने के बाद आज झांसी में पूर्व राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने मुलाकात के साथ आगे की चर्चा की।
लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां चोरों पर हैं । सभी दल अपने-अपने तरीके से तैयारी कर रहे हैं । लंबे समय से कयास चल रहे थे कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन हो सकता है ।
हालांकि इसको लेकर काफी देर तक उठा पटक की स्थिति भी बनी रही । कभी खबरें यह भी आई कि गठबंधन टूट गया , तो कभी खबरें आई सीटों को लेकर चर्चा अंतिम तौर में है । बीते रोज राहुल गांधी और अखिलेश यादव की चर्चा के बाद यह तय हुआ कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 17 सीटों पर लोकसभा का चुनाव लड़ेगी बाकी की सीटों पर समाजवादी पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी।
लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड की सीटे सभी दलों के लिए बहुत अहम है । इसमें झांसी ललितपुर सीट पर दोनों ही दल अपने-अपने दावेदारी कर रहे थे और गठबंधन से पहले चर्चा यह थी कि समाजवादी पार्टी के खाते में यह सीट आ सकती है, इसको लेकर पूर्व राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव बीते कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार सक्रिय भी नजर आ रहे थे।
इधर पिछले 5 सालों से लगातार क्षेत्र में सक्रिय और लोगों की समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे प्रदीप जैन आदित्य पूरी तरह से आश्वासन थे कि गठबंधन में झांसी ललितपुर लोकसभा की सीट कांग्रेस के खेमे में ही आएगी और आखिर ऐसा ही हुआ झांसी लोकसभा की सीट कांग्रेस को मिलने के बाद यह भी लगभग तय है कि लोकसभा के लिए कांग्रेस प्रदीप जैन को ही अपना उम्मीदवार बनाएगी
दरअसल पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य जिस तरह से पिछले 5 सालों से बिना रुके लोगों के बीच जाकर कई सारे मुद्दों को उठाते हुए केंद्र और प्रदेश की सरकार पर हमला कर रहे थे।
सड़क , बिजली , पानी, पलायन, उद्योग और बेरोजगारों की समस्याओं से लेकर झांसी और ललितपुर के तमाम मुद्दों को वह लगातार सरकार और प्रशासन के सामने रख रहे थे। प्रदीप जैन आदित्य इस कार्य शैली का ही नतीजा रहा कि कई मामलों में शासन और प्रशासन ने भी उनकी मांगों पर ध्यान दिया।
अब जब लोकसभा के लिए तैयारी शुरू हो चुकी हैं , ऐसे में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को यदि जमीनी तौर पर कार्यकर्ता मिलकर जोश दिखाते हैं , तो निश्चय ही इस सीट पर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है!
आपको बता दें कि पूर्व के लोकसभा चुनाव में पूर्व राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव भी उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमा चुके हैं । उन्होंने उमा भारती के खिलाफ चुनाव लड़ा था और बड़ी संख्या में वोट भी हासिल किए थे।
वही प्रदीप जैन के बारे में कह सकते हैं कि वह सन 2014 के चुनाव में जब कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त लहर थी, उस समय भी उन्होंने 50000 से अधिक वोट प्राप्त किए थे।
फिलहाल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में गठबंधन हो गया है । अब सभी की नजरे इस बात पर टिकी है कि गठबंधन जमीनी तौर पर कितना कारगर साबित होता है और दोनों दल मिलकर किस तरह से भाजपा और अन्य दलों के सामने चुनौती पेश करते हैं।
