झांसीः नगर के कई इलाके मे लोग प्यास बुझाने के इंतजाम नहीं कर पा रहे। उन्हे किसी का आसरा नहीं है। सरकारी व्यवस्था से लेकर जनप्रतिनिधि अपने मे मस्ते हैं। अब आगे क्या होगा, यह किसी को नहीं पता। प्यास के लिये पानी जुटाने वाले सांसद और विधायक नगर से लापता हैं।
झांसी पिछले कई दिनो से पीने के पानी को लेकर पानी-पानी है। गर्मी मे तरबतर लोग पानी के लिये अपने पसीने छुड़ाने पर आमादा है, लेकिन एक बाल्टी पानी मिल जाए, तो उन्हे अपना पसीना बहाने का दर्द नहीं होता। जैसे ही किसी मुहल्ले मे पानी का टैंकर नजर आता, लोगो को लगता मानो भगवान आ गये हो।
पहले चंद मुहल्ले पानी की समस्या की चपेट मे थे। खासकर डडियापुरा इलाका। धीरे-धीरे घनी बस्ती वाले इलाके भी पानी के रसातल मे जाने से प्यासे नजर आने लगे हैं। नझाई बाजार, वासुदेव, मसीहागंज, नानक गंज, राई का ताजिया आदि मुहल्ले पानी को लेकर जंग के हालात मे हैं।
पिछले एक हफते से ज्यादा का समय हो गया है। पीने के पानी नल से नदारद है। मीडिया मे लगातार इस बात की खबर आ रही है कि पानी के लिये लोग परेशान हैं, लेकिन सांसद और विधायक अपनी राजनीति मे व्यस्त हैं।
सांसद उमा भारती झांसी आयी, तो लक्ष्मी ताल के सुन्दरीकरण का अभियान चलाकर वापस दिल्ली लौट गयी। विधायक रवि शर्मा लखनउ की सैर पर निकल गये।
राजीव सिंह पारीछा का यह कार्यक्षेत्र नहीं है। वैसे समारोह मे शामिल होना हो, तो उन्हे क्षेत्र की परवाह नहीं। किसान के मसीहा बनकर विधायकी का ताज हासिल करने वाले विधायक जवाहर सिंह राजपूत भी पानी को लेकर पानी-पानी है।
कमाल तो इस बात का है कि विपक्ष दल के नेता भी पानी को लेकर प्यासे हैं। इसके बाद भी उनके बोल नही फूट रहे। हां, अपने दल के नेता की बात आ जाए, तो दो मिनट मे धरना के लिये सड़क पर नजर आ जाएंगे। जनता पूछ रही है कि क्या यही है विपक्ष की राजनीति? जनता यह भी पूछ रही कि कब तक पानी के लिये राजनीति होती रहेगी?
