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दद्दा ध्यानचंद ने हिटलर की प्रस्ताव को ठुकरा दिया और भारत माता की सेवा की :अरविंद वशिष्ठ रिपोर्ट: अनिल मौर्य

झांसी: आज खेल दिवस के रूप में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की 118 वीं जयंती मनाई गई!
कार्यक्रम की अध्यक्षता अरविंद वशिष्ठ सदस्य इंडो जर्मन टूल रूम सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार ने की ! उक्त अवसर पर सर्व श्री राजेंद्र रेजा, व्यापारी एवम किसान नेता जितेंद्र भदौरिया, निखिल पाठक, शिवम नायक ,सैयद अली, अयान अली हाशमी, अभिषेक कनौजिया, अभिषेक दिक्षित, मनीष कश्यप ,सिद्धार्थ गौतम मनीषा पांडे ,अंजुल पुरोहित ,मनीष पटसरिया ,अमित चक्रवर्ती, शादाब खान आदि सभी ने उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला !
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अरविंद वशिष्ठ सदस्य इंडो जर्मन टूल रूम सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार ने कहा कि दद्दा ध्यानचंद 16 साल की उम्र में भारतीय सेवा में भर्ती हुए थे और उन्होंने उसके बाद से ही हॉकी खेलना शुरू किया था! मेजर ध्यानचंद जब खेला करते थे तब लोग उनकी हॉकी स्टिक के बारे में लोग सोचते थे कि चुंबक तो नहीं लगा है जो गेंद उनकी हॉकी से चिपक जाती है और वह इतनी रफ्तार के साथ दनादन गोल कर देते हैं इसीलिए उन्हें हॉकी का जादूगर कहा गया! उनके हॉकी के खेल से प्रभावित होकर स्वयं हिटलर ने उन्हें जर्मन सेना के बड़े पद के लिए प्रस्ताव दिया लेकिन देश के प्रति उनका प्रेम इतना था कि उन्होंने हिटलर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और आजीवन भारत माता की सेवा की!

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