चिन्मय मिशन झांसी के ज्ञान यज्ञ के आज द्वितीय दिवस प्रवचन में दीप प्रज्वल्लन झांसी ललितपुर सांसद पत्नी श्रीमती पूनम शर्मा, डॉक्टर संतोष कुमार राय, सुधीर अरोड़ा, डॉ अशोक सक्सेना, हरीश अग्रवाल, एमएल सिरोठिया, आरपी गुप्ता, जेपी दुबे, सचिव ईo मुकेश गुप्ता, रजनी गुप्ता द्वारा किया गया। मुख्य प्रवचन कर्ता स्वामी अद्वैतानंद जी ने कृष्ण लीला रहस्य समझाते हुए कहा भगवान प्रकट होते है उनका जन्म नही होता है। वो प्रकृति को नियंत्रण में ले अव्यक्त से व्यक्त होते है। भगवान कहते है कि मेरी लीला जैसे समर्थ हो तभी मेरी बराबरी करो। अन्यथा मेरी भक्ति करो। आज सुबह के उपनिषद ज्ञान सत्र में भगवान शंकराचार्य कृत दृग दृश्य विवेक प्रकरण ग्रंथ में ध्यान की विषय वस्तु पर प्रवचन हुआ। यह भागवत जी के 6वे अध्याय में उल्लेखित है। ध्यान में प्रमुख विषय बिंदु ध्येय है। इसके अतिरिक्त ध्यान की प्रकिया, प्रयोजन, बाधा और तत्पश्चात उसका फल चिंतनीय बिंदु है। ध्यान का ध्येय सांसारिक विषय होगे तो फल भी विष जैसा मिलेगा। हमारा मूल स्वरूप सच्चिदानन्द ही ध्यान का एकमात्र ध्येय होना चाहिए। ब्रह्मचारी राघवेंद्र ने सभी आगुंतको को चिन्मय मिशन की लाइफ मेंबरशिप हेतु प्रेरित किया। गुरुदेव आरती में श्रीमती अनिता गुप्ता, सुशील गुप्ता, शरद गुप्ता, मेघना गुप्ता, मोहन सिंह, डॉ पदमा गुलाटी आदि शामिल रहे। इस ज्ञान अमृत का लाभ लेने हेतु आज 400 से अधिक साधकों से साथ श्रीमती कांति,संगीता गुप्ता, प्रेमलता गुप्ता, दीप्ति गुलाटी, विनोद सरोगी, आरके धवन, सीताराम बिल्लयां, वीके सेठ, प्रेमलता अत्रि, गोपाल गोयल, एससी अत्रि, पीएन गुप्ता, आरसी गुप्ता, कृष्णा सक्सेना, वीके सेठ, एसपी गुप्ता, एसएन गुप्ता आदि साधक उपस्थित रहे। प्रवचन उध्वोधन के पूर्ण होने पर सभी साधकों के लिए मधुर प्रसाद प्रायोजक डॉ प्रमोद गुलाटी, डॉ अशोक सक्सेना, श्रीमती अनिता की ओर से किया गया। चिन्मय मिशन सचिव ईo मुकेश गुप्ता ने संचालन और सबका आभार व्यक्त किया गया।
ध्यान में ध्येय है सबसे महत्वपूर्ण स्वामी अद्वैतानंद
