कोंच।* यहां गहोई भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास आचार्य मिथलेश दास महाराज ने भगवद् अवतरण का हेतु बताते हुए कहा कि भक्तों के कष्ट दूर करने के लिए ही भगवान इस धरा धाम पर अवतरित होते हैं लेकिन यह तभी संभव है जब भक्त निश्छल और कपटरहित हृदय से उनका स्मरण करता है। उन्होंने परमात्म तत्व के बारे में भी श्रोताओं को विस्तार से बताया।
समाजसेवी शंभूदयाल सोनी द्वारा संयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास ने अपनी रसमयी वाणी से श्रोताओं को भगवद्कथाओं का रसपान कराया। भगवान की मनोहारी लीलाओं का वर्णन सुन श्रोता भावविभोर हो गए। उन्होंने कथा प्रवाह के दौरान भगवान के अवतरण का हेतु बताते हुये कहा कि गाय, ब्राह्मण, संत और सत्संगी जीवों पर जब भी विपत्ति आती है और वे निर्मल मन से जब भगवान का स्मरण करते हैं तब परमात्मा किसी न किसी रूप में इस धरा पर अवतार धारण करते हैं। कथा व्यास बताते हैं कि परमात्मा का वास सब जगह है, बस जरूरत है उसे पहचानने की, जो भी उसे सच्चे मन से स्मरण करता है वह अवश्य ही उसे प्राप्त होते हैं। कथा में उन्होंने गंगावतरण की मनभावन कथा सुनाते हुए कहा कि राजा सगर के पुत्रों के मोक्ष के लिये रघुवंश के प्रतापी राजा भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए घोर तपस्या की और अंतत: वह उन्हें लाने में सफल रहे। अंत में परीक्षित गीता देवी व शंभूदयाल सोनी ने भागवत महापुराण की आरती उतारी, अंत में प्रसाद वितरित किया गया।
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भक्तों के कष्ट दूर करने के लिए अवतार धारण करते हैं भगवान-मिथलेश दास
