*भारत आएंगे ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, फोन पर वैश्विक चुनौतियों पर PM मोदी से की चर्चा*
* पीएम मोदी ने लूला डी सिल्वा से बातचीत में ग्लोबल साउथ के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है।
*बीपीसीएल ब्राजील की पेट्रोब्रास से 12 मिलियन बैरल तेल खरीदेगा*
* यह डील रूस पर भारत की निर्भरता कम करेगी
* भारत मध्य पूर्व, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका पर ध्यान केंद्रित कर रहा है
* प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह जल्द ही भारत में, ब्राजील के राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।
*ब्राजील और भारत ही वो देश हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति का खामियाजा सबसे पहले से भुगत रहे हैं। लूला तो ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कट्टर विरोधी हैं। ऐसे में उनके इस भारत दौरे के मायने बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।*
[1/24, 09:49] +91 98203 71177: *तेल को भूल जाइए भारत को रेकॉर्ड सोना बेच रहा रूस, यूक्रेन जंग में ट्रंप के इरादों पर फिरा पानी*
*अमेरिका और पश्चिमी देशों ने यूक्रेन में युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ भारी प्रतिबंध लगा रखे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी पुतिन ने दोस्त भारत के साथ व्यापार जारी रखा है। इसके लिए उन्होंने तरीका भी ढूढ़ लिया है।*
* भारत रूस के शीर्ष विदेशी व्यापारिक साझेदारों में शामिल हो गया है.
* वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और रूस के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 68.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.
* यह वर्ष 2021 में करीब 13 अरब डॉलर था.
* इस तरह चार वर्षों में भारत-रूस व्यापार में लगभग पांच से छह गुना वृद्धि हुई है.
* दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है.
* यह साझेदारी अब केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रही, बल्कि फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रही है.
*अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल वॉइट हाउस में आने के बाद यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए रूस के ऊर्जा निर्यात को निशाना बनाना शुरू किया था। इसमें रूस पर प्रतिबंधों को कड़े करने के साथ ही भारत जैसे देशों पर रूसी तेल खरीदने के लिए दंडात्मक टैरिफ भी लगाए गए।*
■ ट्रंप के तमाम प्रयासों के बाद भी रूस कमजोर नहीं पड़ा है। बल्कि इसने अब अमेरिकी प्रतिबंधों की काट भी ढूढ़ ली है।
■ रूस अब भारत के साथ अपने लेनदेन के लिए सोने का इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने पिछले साल पहले 10 महीनों में भारत को 5 करोड़ डॉलर (करीब 458 अरब भारतीय रुपये) से ज्यादा का सोना निर्यात किया है।
■ अगस्त 2025 में 2.34 करोड़ डॉलर मूल्य के सोने के शिपमेंट के साथ डिलीवरी फिर से शुरू की गई थी, जो 2021 के बाद सबसे बड़ी थी। अक्टूबर में 2.69 करोड़ डॉलर का सोना और भेजा गया।
■ अमेरिकी राष्ट्रपति ने अगस्त महीने में ही रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी पहुंच गया जो दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ में से एक है। यह टैरिफ अभी तक लागू है।
■ ट्रंप प्रशासन का कहना है कि रूसी तेल की खरीद से पुतिन को यूक्रेन में अपना युद्ध जारी रखने के लिए फंडिंग मिलती है।
■ दुनिया की अर्थव्यवस्था जिस अमेरिकी डॉलर के इर्द-गिर्द घूमती रही है, क्या अब उसका दबदबा टूटने वाला है? अमेरिका की सख्त टैरिफ नीति, आर्थिक दबाव और मनमाने फैसलों से परेशान कई देश अब नए रास्ते तलाश रहे हैं. इसी बीच BRICS देशों की साझा करेंसी की चर्चा ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है. सवाल यही है कि अगर BRICS की अपनी मुद्रा आ गई, तो क्या डॉलर की ताकत सच में कमजोर हो जाएगी?
■ आज अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है. कच्चा तेल हो या बड़ी अंतरराष्ट्रीय डील, ज्यादातर लेनदेन डॉलर में ही होते हैं. इसी वजह से डॉलर सिर्फ एक करेंसी नहीं, बल्कि अमेरिका की आर्थिक और राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा हथियार बन गया है. कई देशों की अर्थव्यवस्था सीधे या परोक्ष रूप से डॉलर पर निर्भर हैं.
■ डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका की व्यापार नीति और ज्यादा सख्त मानी जा रही है. भारी टैरिफ, प्रतिबंध और दबाव की राजनीति से कई देशों को नुकसान झेलना पड़ा है. भारत, ब्राजील, चीन जैसे देशों के साथ ट्रेड को लेकर लगातार तनाव की खबरें सामने आती रही हैं. इसी कारण कई देश यह सोचने लगे हैं कि क्या डॉलर पर निर्भरता कम की जा सकती है.
*BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. ये देश दुनिया की बड़ी आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. BRICS देशों का आपसी व्यापार लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में वे चाहते हैं कि आपसी लेनदेन के लिए डॉलर के बजाय कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो, जिससे अमेरिका के आर्थिक दबाव से बचा जा सके.*
