भारतीय संस्कृति में स्त्री व पुरुष की एकसमान भूमिका, उनका समावेशी विकास बहुत जरूरी – डॉ सुधाकर पांडेय*

*सीएमओ कार्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जागरूकता गोष्ठी का हुआ आयोजन*

*महिला चिकित्सक, अधिकारी व कर्मचारियों को किया गया सम्मानित*

*भारतीय संस्कृति में स्त्री व पुरुष की एकसमान भूमिका, उनका समावेशी विकास बहुत जरूरी – डॉ सुधाकर पांडेय*

*अन्याय के विरुद्ध महिलाएं कानूनी सहायता लेने में पीछे न रहें- डॉ कुसुम पांडेय*

*स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार व समाज का निर्माण कर सकती है- डॉ एन के जैन*

*झांसी दि0- 9 मार्च 2026*

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी के सभागार में *”महिला स्वास्थ्य एवं समाज में महिलाओं की भूमिका”* विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के अध्यक्षता डॉ सुधाकर पांडेय मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ कुसुम पांडेय द्वारा की गई। गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ सुधाकर पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्त्री और पुरुष की एक समान भूमिका है। न तो पुरुष उच्च है और न ही महिला का दर्जा निम्न है। स्त्री और पुरुष मिलकर ही परिवार व समाज की नींव रखते हैं तथा एक दूसरे के पूरक हैं। इसलिए महिलाओं को प्रतिदिन सम्मान देना चाहिए एवं उनके सामाजिक और आर्थिक विकास में पुरुषों को सहभागी बनना चाहिए। हमें महिलाओं और लड़कियों को आगे बढ़ाने, कौशल साझा करने, और समावेशी विकास के लिए सहयोग व उदारता पर जोर देना चाहिए।

डॉ कुसुम पांडेय ने गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए कहा कि स्त्री जननी है, उसके पास सृजन की क्षमता है, जिससे सृष्टि का संचालन सुचारु रूप से चलता रहता है। महिला सभी कार्य करने में सक्षम है। महिलाओं को कर्तव्यों के साथ ही अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक होना चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर अन्याय के विरुद्ध कानूनी सहायता लेने में तत्पर रहना चाहिए। “समाज क्या कहेगा”, यह सोच न रखकर समुचित कानूनी कदम उठाने चाहिए, तभी महिला सशक्त हो सकती है और एक सशक्त महिला सुरक्षित समाज का निर्माण करने में सक्षम हो सकती है।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एन के जैन ने कहा कि महिलाओं को परिवार के साथ ही अपने स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। 30 वर्ष की आयु के पश्चात महिलाओं को समय-समय पर अपनी जांच अवश्य करानी चाहिए। महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग नहीं रहती हैं, जिसके कारण गैर संचारी बीमारियां जो कि समय पर जांच द्वारा पहचानी जा सकती थी एवं उनका उपचार निदान हो सकता था, वह गंभीर रूप ले लेती हैं। महिला दिवस के अवसर पर सभी को नियमित जांच कराने का संकल्प लेना चाहिए।

गोष्ठी के पश्चात मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा महिला चिकित्सकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र दिया गया।
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*इन्होंने प्राप्त किया प्रशस्ति पत्र——*
डॉ शशि बाला चौधरी चिकित्सक
डॉ आरती रानी चिकित्सक
डॉ रेनू अग्रवाल चिकित्सक
डॉ सीमा मीना चिकित्सक
डॉ समरीन चिकित्सक
डॉ चंचल चिकित्सक
डॉ आकांक्षा चिकित्सक
डॉ जूही सूलिया एसएमओ डब्ल्यूएचओ
डॉ विजयश्री शुक्ला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी
डॉ अनुराधा राजपूत एपिडेमियोलॉजिस्ट
श्रीमती रानी श्रृंगी ऋषि एआरओ
श्रीमती मेघा गुप्ता एआरओ
श्रीमती पिंकी दिवाकर एआरओ
श्रीमती शालिनी सिंह वरिष्ठ सहायक
कु. नेहा यादव कनिष्ठ सहायक
श्रीमती सपना वर्मा कंप्यूटर ऑपरेटर
श्रीमती ममता पटेल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
श्रीमती लवली मिश्रा आयुष्मान मित्र
श्रीमती सुनीता एएनएम
श्रीमती सुनीता राजपूत आशा कार्यकत्री
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सीएमओ कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एन के जैन, पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ उत्सव राज, कंट्रोल रूम प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश चंद्र, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डॉ विजयश्री शुक्ला, जिला क्वालिटी कंसल्टेंट डॉ मनीष खरे, अर्बन कोऑर्डिनेटर जियाउर्रहमान, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ अनुराधा राजपूत, श्री सपन जैन, श्री शशांक पुरोहित सहित महिला अधिकारी व कर्मचारी उपस्थिति रहीं।

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