मौत से लड़ने मे आखिर हार गये अटल, देश मे शोक की लहर

नई दिल्ली 16 अगस्तः मौत से लड़ रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आखिर हार मान ही ली। शाम पांच बजकर पांच मिनट पर उन्होने अंतिम सांस ली। एम्स की ओर से जारी बयान मे उनकी मौत की पुष्टि हुयी।

भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है. देश की राजनीति के सबसे करिश्माई और लोकप्रिय चेहरों में से एक वाजपेयी ने 93 साल की उम्र में एम्स मे अंतिम सांसें लीं.

वे पिछले दो महीने से ज्यादा समय से एम्स के बिस्तर पर थे और मौत से उनकी ‘ठनी’ हुई थी, हालांकि आज शाम पांच बजकर पांच मिनट पर उन्होंने अलग रास्ता चुना और ‘काल के कपाल पर लिखकर’ वे इस दुनिया से कूच कर गए. उनके खुद के शब्दों में ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं’.

वाजपेयी अस्वस्थता के चलते लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर थे. वे डिमेंशिया नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. 2009 से ही वे व्हीलचेयर पर थे, देशवासियों ने उन्हें अंतिम बार 2015 में 27 मार्च को देखा, जब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भारत माता के इस सच्चे सपूत को भारत रत्न से सम्मानित करने उनके आवास पर पहुंचे.

दो महीने पहले वाजपेयी की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई. यूरिन में इन्फेक्शन के चलते 11 जून को उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी और देश की अलग-अलग पार्टियों के नेता और अनेक गणमान्य हस्तियां उनका हालचाल जानने पहुंचीं. उनके समर्थक लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रहे थे, हालांकि कुदरत को शायद कुछ और मंजूर था. मोदी ने कहा कि उनके पास शब्द नहीं है।

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