शोध पत्रिकाएं ज्ञान और समाज दोनों के लिए लाभदायक- प्रो श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी, रिपोर्ट -राजेश शिवहरे

अनूपपुर (मध्य प्रदेश राजेश शिवहरे)पत्रिकाओं से ज्ञान का क्षेत्र और समाज दोनों ही समृद्ध होता है। ऐसे प्रकाशन शोध पत्रों को और समृद्ध कर तथा लेखक की शैली का परिमार्जन कर उन्हें समृद्ध करने का कार्य करते हैं। एक अध्यापक को शिक्षण, पठन-पाठन के साथ-साथ लेखन में भी प्रवीणता अर्जित करनी चाहिए। उक्त उद्गार इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी जी ने मेकल मीमांसा अर्धवार्षिक शोध पत्रिका के वर्ष 14, अंक दो का विमोचन करते हुए अभिव्यक्त किए । यह पत्रिका यूजीसी की प्रतिष्ठित केयर लिस्ट में सूचीबद्ध है। उन्होने आगे कहा कि मेकल मीमांसा के माध्यम से विमर्श के नए आयाम उपस्थित कर रही है जो ज्ञान के क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक और उपयोगी है। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन में मुख्य संपादक प्रो राघवेंद्र मिश्रा ने कहा कि कुलपति जी के संरक्षण और उत्साहवर्धन में पत्रिका का निर्बाध प्रकाशन हो रहा है और इसमें छपने के लिए देश भर से लेखक अपने शोधपत्र प्रेषित कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ ललित कुमार मिश्रा ने किया और धन्यवाद प्रकाश प्रो ज्ञानेन्द्र राऊत ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षकों, शोधर्थियों, विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का आयोजन अकादमिक सभागार में किया गया।

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