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सामूहिक विवाह सम्मेलन: संवेदना, संस्कार और समर्पण का अलौकिक संगम; नवदंपतियों को डॉ० संदीप ने दिया शुभाशी

सामूहिक विवाह सम्मेलन: संवेदना, संस्कार और समर्पण का अलौकिक संगम; नवदंपतियों को डॉ० संदीप ने दिया शुभाशीष 

झाँसी। 20 फरवरी को शीतला माता मंदिर प्रांगण, मोंठ में आयोजित सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन सामाजिक समरसता, करुणा और संस्कारों का जीवंत उत्सव बन गया। मंगलध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चार और शहनाई की मधुर तान के बीच नवदम्पतियों ने सात फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुभ शुरुआत की। उपस्थित जनसमुदाय की आँखों में स्नेह, आशीर्वाद और बेटियों के सम्मान के प्रति गर्व झलक रहा था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, संघर्ष सेवा समिति के संस्थापक डॉ. संदीप सरावगी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि सामूहिक विवाह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी का पावन निर्वहन है। उन्होंने नवदम्पतियों को शुभाशीष देते हुए प्रेम, विश्वास और त्याग को वैवाहिक जीवन की आधारशिला बताया।

इस गरिमामय आयोजन के संयोजक रिषी राना ने पूरे समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया। उन्होंने बताया कि समाज की सहभागिता से ही ऐसे आयोजनों की सार्थकता सिद्ध होती है और यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा। उनके नेतृत्व और अथक परिश्रम ने सम्मेलन को भव्यता और सुव्यवस्था प्रदान की।

इस अवसर पर जिन वर-वधुओं का परिणय संस्कार संपन्न हुआ, उनमें रिंकी देवी का विवाह गोलू के साथ, द्रोपदी का रामलखन के साथ, प्रियंका का ध्रुव के साथ, रागिनी का आनंद के साथ, रनेहा का सुमित कुमार के साथ, काजल का चन्द्रशेखर के साथ, निशा का मंगल सिंह के साथ तथा गुड़िया का धर्मेन्द्र कुमार के साथ वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। प्रत्येक युगल ने अग्नि को साक्षी मानकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।

समारोह में सामाजिक कार्यकर्ताओं, गणमान्य नागरिकों एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। नवविवाहित जोड़ों को आवश्यक गृहस्थी सामग्री भेंट कर उनके नए जीवन की नींव को सुदृढ़ करने का भावपूर्ण प्रयास भी किया गया। यह आयोजन केवल विवाह संस्कार का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों की उज्ज्वल अभिव्यक्ति बनकर स्मृतियों में अंकित हो गया।

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