बेगलुरू 13 मईः चुनाव जीतने की कला मे महारत हासिल रखने वाले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को कनार्टका के मुख्यमंत्री सिद्वारमैया ने जिस अंदाज मे पटकनी दी, उसने सिद्वारमैया का भाग्य काफी महत्वपूर्ण रहा। चारो तरफ से घिरे सिद्वारमैया ने अंतिम समय तक अपनी बाजी के पत्ते बड़ी ही खामोशी से चले।
दरअसल, अमित शाह और जेडीएस के बीच हुयी चुनावी रणनीति की भनक लगने के बाद सिद्वारमैया ने अपने राजनैतिक अनुभव और राहुल के सहज स्वभाव को मिलाकर रणनीति बनायी।
सिद्वारमैया ने राहुल गांधी से साफ कह दिया था कि वो अपने दम पर इस चुनाव को जिताकर दिखाएंगे। यही कारण रहा कि उन्होने कनार्टका का चुनाव मोदी बनाम राहुल नहीं होने दिया।
अमित शाह अंतिम समय तक यह कोशिश करते रहे कि मोदी बनाम राहुल चुनाव होने की संभावनाएं पूरे प्रदेश मे फैल जाएं और कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन सके। सिद्वारमैया के भाग्य ने अमित शाह के प्लान पर ऐसा पानी फेरा कि हर नीति फेल साबित हो गयी।
एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस को कर्नाटक में 106-118 सीट मिलने जा रही हैं. शनिवार को कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा की 222 सीटों के लिए मतदान हुआ था. कर्नाटक विधान सौध (विधानसभा) में बहुमत का जादुई आंकड़ा 113 है. क्योंकि अभी 222 सीटों के लिए मतदान हुआ है तो फिलहाल बहुमत के लिए 112 सीट की ही आवश्यकता है.
एक्सिस के अनुमान के मुताबिक कांग्रेस एंटी इंकम्बेंसी पर आसानी से पार पाते हुए कर्नाटक में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने जा रही है. राज्य में 1985 के बाद से कोई पार्टी लगातार दो बार चुनाव नहीं जीत पाई है. 1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में जनता पार्टी दोबारा चुनाव जीतकर सत्ता में आई थी.
कर्नाटक में कांग्रेस के विजेता के तौर पर उभरने की मुख्य वजह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का जाति समीकरणों को साधना रहा है. सिद्धारमैया अल्पसंख्यकों, पिछड़ी जातियों और दलितों (AHINDA) को मिलाकर बड़ा जातीय गठबंधन बनाने में कामयाब रहे. बीजेपी अपने लिंगायत वोट बैंक में कोई सेंध लगने को रोकने में कामयाब रही, लेकिन खुद किसी बड़े सामाजिक गठबंधन का तानाबाना नहीं बुन पाई जो सिद्धारमैया के AHINDA फॉर्मूले को मात दे पाता.
