झाँसी | आधुनिक जीवन शैली और स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल ने रीढ़ की सेहत को कमजोर करना शुरू कर दिया है| मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने घंटो झुककर बैठने की आदत युवाओं की रीढ़ पर बुरा असर डाल रही है |रीढ़ शरीर की मुख्य धुरी है लेकिन गलत मुद्रा, व्यायाम की कमी और लंबे समय तक झुक कर बैठने से युवाओं में रीढ़ से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं |
विश्व रीढ़ दिवस पर विशेषज्ञों ने लोगों को बैठने की मुद्रा, चलने के तरीके और दैनिक दिनचर्या में सुधार की सलाह दी है | मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभागध्यक्ष डॉ दिनेश राजपूत का कहना है कि 30 से 40 वर्ष के लोगों में स्लिप डिस्क और सर्वाइकल दर्द के मामले पहले की तुलना में दोगुनी हो चुके हैं| भागमभाग जिंदगी में लोग अपने शरीर पर ध्यान नहीं देते हैं| इससे कई तरह की परेशानियां बढ़ रही हैं |
दफ़्तरो में आरामदायक कुर्सी पर घंटा बैठे रहने से भी दिक्कत बढ़ती है| मोबाइल की स्क्रीन पर झुक कर देखने से गार्डन 45 डिग्री के कौढ़ पर झुक जाती है, जिससे रीढ़ पर चार गुना ज्यादा दबाव पड़ता है | सुबह से शाम तक दफ्तर के अंदर रहने की दिनचर्या की वजह से विटामिन-डी की कमी होने से भी दिक्कत बढ़ती जाती हैं |
मेडिकल कॉलेज के न्यूरो मेडिसिन विभागध्यक्ष डॉ अरविंद कनकने का कहना है कि जिनकी बैटरी में मुद्रा सही और सक्रिय जीवन शैली होती है, उन्हें रीढ़ की दिक्कत नहीं होती है|
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स्मार्टफोन से बिगड़ रही रीढ़ की सेहत
