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बाबरिया हाईकमान को बता पाएंगे मप्र में कांग्रेस का सूरत-ए-हाल!

संदीप पौराणिक
भोपाल, 13 अक्टूबर । मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या यूं कहें कि उसका चेहरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तय है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में अभी संगठन चुनाव को लेकर ही माथा-पच्ची जारी है। कांग्रेस का जो हाल है, उसे नए प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने भी देख लिया। अब बात यही है कि क्या बाबरिया कांग्रेस की इस सूरत-ए-हाल को पार्टी हाईकमान को बता पाएंगे।

कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी के पद पर मोहन प्रकाश की जगह राष्ट्रीय महासचिव दीपक बाबरिया की नियुक्ति की है। बाबरिया का नाता गुजरात से है और उनकी गिनती राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के करीबियों में होती है। प्रभारी बनने के बाद बाबरिया सोमवार और मंगलवार को राजधानी में रहे।

इस दौरान उन्होंने नवनिर्वाचित प्रदेश प्रतिनिधियों से संवाद किया और विधायकों के साथ बैठक की। प्रतिनिधियों ने कांग्रेस की कमियां गिनाईं, सुधार पर जोर दिया, गुटबाजी भी सामने आई। इतना कुछ होने के बाद भी इस दौरान बाबरिया ने कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की।

बाबरिया के प्रवास के पहले दिन तो विधायक ओंकार सिंह मरकाम प्रतिनिधियों के निर्वाचन को लेकर सामने आ गए। उन्होंने मीडिया के सामने ही कांग्रेस के भीतर की हकीकत को उजागर कर दिया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस का प्रदेश प्रतिनिधि उस व्यक्ति को बना दिया गया, जो पार्टी से निष्कासित रहा है। उनकी बात प्रदेश में नहीं सुनी गई तो वे दिल्ली में राहुल गांधी को बताएंगे, क्योंकि गांधी की मंशा को ही दरकिनार किया जा रहा है।”

सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश के कांग्रेस इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ होगा, जब प्रदेश प्रभारी की मौजूदगी में एक विधायक की आपत्ति पर प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव को विधायकों की बैठक से बाहर जाना पड़ा। इस मौके पर न तो बाबरिया कुछ बोले और न ही कोई विधायक। यह अनुशासनहीनता और एक विधायक की दादागिर्दी को जाहिर करने वाला है।

राजनीति के जानकार कहते हैं कि अगर ऐसा भाजपा में होता तो संबंधित पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय थी, इसका उदाहरण उमा भारती हैं। उन्होंने जब बैठक में आक्रोश जाहिर किया था और बैठक से बाहर चली गई थी तो उन्हें पार्टी ही छोड़ना पड़ी थी, मगर कांग्रेस में एक प्रदेशाध्यक्ष को अपमानित किया गया और कोई कुछ नहीं बोला, कार्रवाई तो दूर की बात है। यही कारण है कि कांग्रेस में अनुशासनहीनता बढ़ी है और पार्टी की पहचान गुटों में बनी है।

वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया का कहना है, “कांग्रेस को प्रभारी के प्रवास के दौरान जिस एकजुटता का प्रदर्शन करना था, वैसा नहीं हुआ। संगठन में बदलाव की बेला में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को गुटबाजी के प्रदर्शन से बचना चाहिए था, क्योंकि आगामी चुनाव में एकजुटता का प्रदर्शन ज्यादा जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा, “पार्टी हाईकमान मध्यप्रदेश की हालत के बारे में बहुत कुछ जानता है, अब वह बाबरिया के जरिए मिले फीडबैक के आधार पर बदलाव और संगठन में बेहतर जमावट के लिए फैसले आसानी से कर सकेगा।”

राज्य में कांग्रेस की राजनीति में संभवत: यह पहला ऐसा मौका रहा होगा, जब नए प्रदेश प्रभारी को अपने पहले प्रवास में वह सब देखने को मिल गया, जो वास्तविक हाल कांग्रेस का है। यहां गुटों के आधार पर कांग्रेस की पहचान है। यहां सोनिया व राहुल से ज्यादा राज्य के प्रमुख नेताओं को बैनर, पोस्टर और नारे लगे।

प्रदेश प्रभारी के दो दिवसीय प्रवास के दौरान कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में काफी गहमा-गहमी रही, राज्य के बड़े नेताओं के नाम के नारे लगे, कांग्रेस की गुटबाजी साफ नजर आई। इस दौरान बाबरिया कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह संदेश देने में भी नाकाम रहे कि अनुशासनहीनता करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।

कुल मिलाकर बाबरिया को वह सब देखने को मिल गया, जो कांग्रेस की वास्तविक हालत है।

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