शोभायात्रा नगर भ्रमण के साथ श्रीकुंज बिहारी मंदिर में श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ
झांसी। सिविल लाइन, ग्वालियर रोड स्थित श्री कुंज बिहारी मंदिर में समस्त गुरुजनों की स्मृति में आयोजित श्रीमद भागवत कथा का कलश यात्रा नगर भ्रमण के साथ गुरुवार 1 जनवरी से शुभारंभ हो गया। कथा व्यास बुंदेलखण्ड धर्माचार्य पूज्य महंत श्री राधामोहन दास महाराज ने रसिक श्रद्धालुओं को प्रथम दिवस श्रीमद भागवत कथा के महातम्य का रसास्वादन कराया।
इससे पूर्व बुंदेलखण्ड धर्माचार्य महंत राधामोहन दास के पावन सानिध्य में प्रात: 11बजे पचकुंइया मंदिर से कलश यात्रा निकाली गयी। कलश यात्रा पचकुंइया मंदिर से प्रारंभ होकर खण्डेराव गेट, आशिक चौराहा, आंतिया तालाब से बीकेडी चौराहा होते हुए कार्यक्रम स्थल कुंजबिहारी मंदिर पर पहुंची जहां सभी श्रद्धालुओं को भण्डारे का प्रसाद परोस कर खिलाया गया।
शोभायात्रा भ्रमण के दौरान स्थान स्थान पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। शोभायात्रा में पीत वस्त्र धारण कर महिलायें सिर पर कलश लेकर एवं मुख्य यजमान सिद्धार्थ शर्मा सिर पर भागवत ग्रंथ धारण कर आगे आगे चल रहे थे। डीजे पर बज रहे धार्मिक भजनों पर थिरकते युवा हाथ में धर्मध्वजा लहराते हुए चल रहे थे, बग्गी पर सवार भगवान बांकेबिहारी का मनमोहक विग्रह स्वरुप शोभायमान हो रहा था।
इस मौके पर पूर्व पार्षद सुजीत तिवारी,कृष्णा अग्रवाल, अजय अग्रवाल, विजय अग्रवाल,गोविंद अग्रवाल, श्रीराम साहू, कुंजबिहारी मंदिर के पुजारी बालकदासजी, गिरवरधारी मंदिर के पुजारी मदनमोहन दास मौजूद रहे। सायंकालीन बेला में प्रथम दिवस का प्रसंग सुनाते हुए महंत राधामोहन ने कहा कि श्रीमद भागवत कल्पवृक्ष का पका हुआ फल है।श्रीमद भागवत को भगवान श्री कृष्ण का वांगमय स्वरुप बताते हुए वे कहते हैं कि संत और भगवंत की कृपा होने से ही इस प्रकार के दुर्लभ अवसर जीव को प्राप्त होते हैं।मानव तन को दुर्लभ बताते हुए उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी रामचरित मानस में लिखते हैं बड़े भाग्य मानुष तन पावा,सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा। अर्थात मानव तन पाने के लिए देवता भी तरसते हैं, लेकिन जिस पर संत और भगवंत की कृपा होती है उसे सभी अवसर शुलभ हो जाते हैं। प्रारंभ में आचार्य रामलखन उपाध्याय ने श्री गणेश पूजन,ग्रंथ पूजन एवं व्यास पीठ का पूजन कराया। परीक्षित सिद्धार्थ शर्मा, आकाश शर्मा,श्रीमती अनुभा त्रिपाठी, श्रीमती अनुप्रिया त्रिपाठी ने श्रीमद पुराण की आरती उतारी। अंत में व्यवस्थापक पवनदास ने सभी का आभार व्यक्त किया।
