भगवान श्रीराम का चरित्र और आदर्श सबके लिए अनुकरणीय: प्रो मुकेश पाण्डेय

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मुकेश पाण्डेय ने कहा कि भगवान श्रीराम पूरी सृष्टि के रचयिता हैं। उनका चरित्र और आदर्श सबके लिए अनुकरणीय है। मंगलवार को उक्त उद्गार उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड के साहित्य,समाज और संस्कृति में राम विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में व्यक्त किए।
प्रो पाण्डेय ने कहा कि दो दिन तक चली संगोष्ठी की चर्चा से नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की विलक्षण प्रतिभाओं को ध्यान में रखकर उनके संदेशों को हम सबको आत्मसात करना होगा। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से विद्यार्थियों को अवश्य कुछ न कुछ सीखने को मिला होगा। उन्होंने अल्पकाल में शोध-पत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करवाने पर आयोजन समिति को बधाई दी। प्रो पाण्डेय ने विश्वविद्यालय को प्राप्त नैक प्लस रैंकिंग, पीएम उषा मेरू में इसके होने के तथ्य को भी रेखांकित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का विवरण भी साझा किया। उन्होंने आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने अगले साल भी ऐसा ही कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय क्षेत्र के साहित्य,समाज और संस्कृति के विकास के लिए हरसंभव उद्यम करेगा। उन्होंने विभिन्न संगठनों के मुखिया का आह्वान किया कि वे मिल जुल कर काम करने को आगे आएं।
मुख्य अतिथि छतरपुर के मुख्य विकास अधिकारी श्रीनम:शिवाय अड़जरिया ने कहा कि इतिहास के अध्ययन के लिए हमें नई दृष्टि की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इटली का रोम शहर भी राम को समर्पित रहा। उसकी स्थापना चैत्र रामनवमी को ही हुई। विविध तथ्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम दुनिया भर में विद्यमान हैं। उन्होंने पांच सौ वर्ष पूर्व निर्मित आजानुबाहु मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अनुपम और अप्रतिम है। भगवान श्रीराम का अनूठा मंदिर है। वाल्मीकि के रामायण का उल्लेख करते उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के पास अनेक अस्त्र-शस्त्र थे। उन्होंने बताया कि उनका काम विश्व में राम नाम विषय पर है। उन्होंने भगवान श्रीराम पर रूस में हुए साहित्यिक कार्य का विवरण पेश किया। उन्होंने राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजकों को बधाई दी।
कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने उम्मीद जताई की कि राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुए विचार विनिमय से शिक्षकों और विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि होगी। उन्होंने बेहतरीन सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए विद्यार्थियों की सराहना की। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक डा अमिता द्विवेदी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपुल सागर, स्टेट बैंक की बीयू शाखा के प्रबंधक अजय कुमार ने भी विचार रखे। सभी अतिथियों ने शोध-पत्रों से निर्मित पुस्तकों का भी लोकार्पण किया।
समापन सत्र में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक और कला संकाय के अधिष्ठाता डा पुनीत बिसारिया ने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने विस्तार से संगोष्ठी की सभी गतिविधियों का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने कहा कि हिंदी संस्थान इस संगोष्ठी में आए शोध-पत्रों पर विशेषांक निकालेगा।
समापन सत्र में डा वीबी त्रिपाठी, डा अचला पाण्डेय,डा नवीन पटेल, उमेश शुक्ल, डा राघवेंद्र दीक्षित, डा सुनीता वर्मा, डा सुधा दीक्षित, डा प्रेमलता, डा सुनीता वर्मा,डा स्वप्ना सक्सेना, देवेंद्र भारद्वाज, रंगकर्मी आरिफ शहडोली, निहाल चंद्र शिवहरे, रामशंकर भारती, साकेत सुमन चतुर्वेदी समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। शुरुआत में सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। संचालन डा श्रीहरि त्रिपाठी ने किया। प्रो मुन्ना तिवारी ने आभार व्यक्त किया।

अलग अलग चले तकनीकी सत्रों में विद्वतजनों ने भगवान श्रीराम पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। एक सत्र में डा द्युति मालिनी ने बुंदेली गीतों में श्रीराम विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हालांकि रामायण की रचना वाल्मीकि ने की लेकिन उसे गाकर लव और कुश ने लोक में प्रचलित किया।
ग्वालियर से आए डा धीरेंद्र शर्मा, संध्या निगम ने बुंदेली गीतों में राम शीर्षक का शोध पत्र प्रस्तुत किया। समाज कार्य विभाग के डा मुहम्मद नईम ने बुंदेली विरासत कोंच की रामलीला विषय पर शोध पत्र वाचन किया। उन्होंने बताया कि कोंच की रामलीला लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं। जनसंचार एवं पत्रकारिता शिक्षक उमेश शुक्ल ने मर्यादा के चरम बिंदु : भगवान श्रीराम शीर्षक से अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। डा राघवेंद्र दीक्षित ने मीडिया में श्रीराम के प्रस्तुतीकरण पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। सत्र की अध्यक्षता डा संजय अनंत ने की। सत्र की मुख्य अतिथि डा ब्रजलता मिश्र रहीं।
इस सत्र में दतिया के राज गोस्वामी, समाजसेवी डा नीति शास्त्री, सुनंदा सक्सेना, लखनऊ से प्रो वीरेंद्र यादव ने भी विचार रखे। संजय अनंत ने कहा कि कोई भी वामपंथी, कोई भी अंबेडकरवादी इस संगोष्ठी में नहीं, यह बड़ी कमी रह गई। इस सत्र का संचालन डा सुधा दीक्षित ने किया। इस सत्र में डा विद्या सागर उपाध्याय, भगवान दास राही और
मणिकर्णिका को सम्मानित किया गया। अंत में डा विपिन प्रसाद ने आभार व्यक्त किया।

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