कोलकाता।
ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग की तरफ से अब तक 292 सीटों के रुझान जारी कर दिए गए हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी 192 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे आगे चल रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस अब तक 100 सीटों का भी आंकड़ा नहीं छू सकी है। वहीं, कांग्रेस के एकमात्र उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं।
2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने जिस तरह पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता बचाई थी, क्या इस बार भी वैसा ही करिश्मा दोहराया जाएगा? सत्ता के इस महासंग्राम में आज का दिन बंगाल की नई राजनीतिक दिशा तय करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आइए चुनावी माहौल को विस्तार से समझते हैं।
क्यों खास है 2026 बंगाल चुनाव
यह चुनाव अब सिर्फ इस बात का फैसला नहीं है कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी और नबान्न कौन पहुंचेगा, बल्कि यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट बन गया है। 15 साल के लंबे शासन के बाद यह मुकाबला एक जनमत संग्रह जैसा है, जो तय करेगा कि क्या ममता बनर्जी आज भी बंगाल की निर्विवाद नेता हैं। अगर वह चौथी बार जीत हासिल करती हैं, तो 2029 के आम चुनाव में वह भाजपा के खिलाफ विपक्ष का सबसे ताकतवर चेहरा बन जाएंगी। हालांकि, इस बार उनकी राह में भ्रष्टाचार के आरोप, भर्ती घोटाले और जनता की नाराजगी जैसी बड़ी बाधाएं हैं, जो भाजपा के लिए सत्ता का रास्ता खोल सकती हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Election Result) में इन सीटों पर रहेगी नजर
पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। हालांकि, सोमवार को इस दौरान नजरें खासतौर से भबानीपुर, नंदीग्राम, टॉलीगंज, दिनहाटा, सिंगूर, भांगड़, खड़गपुर सदर, सिलीगुड़ी, बैरकपुर, और रासबिहारी पर होंगी। इन सीटों पर मुकाबला हाई प्रोफाइल माना जा रहा है। राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भबानीपुर से मैदान हैं, जहां उनका मुकाबला 2021 में नंदीग्राम में उन्हें हराने वाले शुभेंदु अधिकारी से है।
क्या रिकॉर्ड मतदान नतीजों पर डालेगा असर?
दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 92.47 प्रतिशत दर्ज किया गया। पहले चरण में 93.13 प्रतिशत और दूसरे में 91.66 प्रतिशत मतदान हुआ। यह स्वतंत्रता के बाद का अब तक का सर्वाधिक मतदान है। इसने 2011 के 84 प्रतिशत मतदान के रिकॉर्ड को भी पार कर लिया, जब बनर्जी पहली बार सत्ता में आई थीं और 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन का अंत हुआ था
