देहरादून।
मीडिया लॉ के जाने मानें प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित एवं डॉ.गगनदीप कौर द्वारा लिखित इस बहुप्रतीक्षित पुस्तक का प्राख्कथन लेखक देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी, देहरादून के फाउंडर प्रेसिडेंट श्री संजय बंसल जी है , जो कि एक सफल एड़ूकेषनिस्ट के साथ साथ उत्तराखण्ड व उत्तरप्रदेश में ब्रांडिंग एम्बेसडर के रूप में भी श्री संजय बंसल जी का विशेष स्थान है
“इटिंग्रिटी पब्लिकेशन नई-दिल्ली” जिसकी भारत समेत लंदन इंग्लैंड एवं न्यूजर्सी अमेरिका में शाखाये है इस प्रतिष्ठित पब्लिशर द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक “लॉ ऑफ़ मिडिया इन द डिजिटल एरा – जर्नलिज़्म जर्नी फ्रॉम प्रिंट टु पिक्सल” कई मायने में आज मीडिया के बढ़ते प्रभाव के विधिक दृश्टिकोण को प्रभावित तरीके से पाठको का ज्ञान-वर्धन करती है
मीडिया नैतिकता का अर्थ है—समाचार, सूचना या मनोरंजन को प्रसारित या प्रकाशित करते समय सही और जिम्मेदार निर्णय लेना।
सरल शब्दों में, यह उन नैतिक सिद्धांतों और मानकों का समूह है जो पत्रकारों, संपादकों, और अन्य मीडिया पेशेवरों को उनके काम में मार्गदर्शन देते हैं ताकि जनता तक पहुंचने वाली जानकारी पूरी तरह सत्य और निष्पक्ष हो।
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। मीडिया नैतिकता यह सुनिश्चित करती है कि समाज में भ्रम या झूठ न फैले और जनता का मीडिया पर विश्वास हमेशा बना रहे।
“मीडिया नैतिकता के प्रमुख सिद्धांत”
सत्यता और सटीकता : मीडिया का यह कर्तव्य है कि वह जो भी खबर दिखाए या छापे, वह पूरी तरह सच, तथ्यात्मक और जांची-परखी हो।
निष्पक्षता : खबरों को बिना किसी पक्षपात, राजनीतिक दबाव या पूर्वाग्रह के प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
निजता का सम्मान : किसी भी व्यक्ति के निजी जीवन में अनावश्यक दखल नहीं देना चाहिए और उसकी गोपनीयता का ध्यान रखना चाहिए।
हानि से बचाव : रिपोर्टिंग करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी निर्दोष व्यक्ति, पीड़ित या समाज के किसी वर्ग को अनावश्यक मानसिक ठेस या नुकसान न पहुँचे।
जवाबदेही : यदि मीडिया से कोई गलती हो जाती है, तो उसे स्वीकार करना और उसमें सुधार करना उसकी नैतिक जिम्मेदारी है।
विधि के छात्र-छात्राओ सहित पत्रकारिता जगत से जुड़े छात्र एवं संपादको के लिये ये एक उपयोगी पुस्तक है
