क्रोधी ही सनातन का विरोधी:जगतगुरु रामस्वरूपाचार्य
राम राज्य बैठे त्रिलोका हर्षित भये गये सब शोका…..
*राम राज्याभिषेक के साथ केशवपुर में चल रही संगीतमय श्रीरामकथा का विश्राम
झांसी।रजत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में केशवपुर धाम में चल रही संगीतमय श्रीरामकथा का राम राज्याभिषेक के साथ मंगलवार को समापन हो गया।
आठवें दिवस चित्रकूटधाम से पधारे श्रीराम कथा के श्रेष्ठ वक्ता कामदगिरि पीठाधीश्वर जगतगुरु रामस्वरुपार्य ने कहा कि राम के राजा बनते ही चारों ओर छाया शोक विषाद आदि सब हर्षोल्लास में बदल गया।जनता जनार्दन सभी प्रफुल्लित होकर जीवन यापन करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी मानस में लिखते हैं “राम राज्य बैठे त्रिलोका, हर्षित भये गये सब शोका।”और “दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज्य काहु नहिं व्यापा।” अर्थात राम के राज्य में किसी को किसी प्रकार का भी कष्ट तो क्या बुखार तक नहीं हुआ। राम राज्य की दुहाई देते हुए जगतगुरु ने कहा कि आज नफरत भरे परिवेश में पिता -पुत्र और भाई -भाई आपस में लड झगड रहे हैं जबकि प्रभु राम ने राजतिलक के समय स्वयं स्नान से पूर्व अपने सखा सभी वानरों और सभी भाईयों को स्नान और अभिषेक कराया तथा बाद में स्वयं स्नान किया। सभी के प्रति उनका समान भाव आज भी राम राज्य का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने क्रोध को पाप की मूल जड़ बताते हुए कहा कि जिसमें क्रोध है वहीं सनातन का विरोधी है। वे कहते हैं कि जिसके हदय में राम हैं वह कभी क्रोध ही नहीं कर सकता। इससे पूर्व उन्होंने सुंदर काण्ड के प्रसंग में हनुमान जी के बुद्धि विवेक और अतुलित बल की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि हनुमान जी सरल हैं। इसलिए उनके हृदय में सीताराम और लक्ष्मण विराजमान रहे हैं। विकास के नाम पर बेतहाशा वृक्षों का कटान, प्रकृति से छेड़छाड़,दिन-रात खनन कर नदियों के स्वरूप बदलने पर रोक लगाने जरुरत बताते हुए जगतगुरु ने कहा कि नदियां पर्वत और वृक्ष यह सब स्वतंत्र है, इन्हें बांधने की जरूरत नहीं है। चित्रकूट, प्रयागराज सहित कई शहरों में आयी बाढ़ को प्रकृति से छेड़छाड़ का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जब किसी को बांधेंगे तो उसका रौद्ररुप धारण करना स्वाभाविक है।
अपने श्रीमुख से मानस मंदाकिनी की अमृत वर्षा करते हुए जगतगुरु ने कहा कि प्रत्येक प्राणी के जीवन में समुद्र की लहरों की तरह समस्यायें है लेकिन राम का नाम अथवा रामकथा रुपी नाव में बैठकर इस भवसागर से पार हो जाओगे क्योंकि रामकथा रुपी नाव की पतवार किसी नाविक के साथ नहीं वह तो हनुमान जी महाराज के हाथ में है।
इससे पूर्व श्रीमती साधना पं बृजमोहन मिश्रा, श्रीमती शालिनी एकांश मिश्रा,श्रीमती ममता प्रमोद गांधी, श्रीमती उमा विनोद साहू बालाजी, विष्णु गुप्ता,अनय मित्तल एवं अजय साहू ने व्यास पीठ एवं ग्रंथ का पूजन कर मानस की आरती उतारी। इस मौके पर महानगर धर्माचार्य आचार्य हरिओम पाठक संत मंडली के साथ कथा श्रवण हेतु पधारे। पं बिरजू महाराज ने उनका माल्यार्पण एवं पट्टिका पहनाकर स्वागत किया। कथा विश्राम के मौके पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ की बंदना एवं चरण पूजन कर जगतगुरु से आशीर्वाद प्राप्त किया।मंच का संचालन पं अनूप शास्त्री ने किया।
प्रातः कालीन वेला में पंचकुंडीय श्रीसीताराम महायज्ञ में यज्ञाचार्य हेमंत कौशिक हरपालपुर के आचार्यत्व में विश्व-कल्याण की कामना से श्रीमती साधना पं बृजमोहन मिश्रा(गुरु जी) श्रीमती शालिनी एकांश मिश्रा, उर्मिला महेश कुमार साहू, प्रियंका सचिन साहू,सरिता अनूप सहगल, साधना आमोद किलपन, प्रगति अमित गंधी, उमा विनोद साहू बालाजी, मोहिनी सत्येंद्र सेन ग्वालियर, मधु राघवेन्द्र सेन खनियांधाना, मनीषा राहुल सोनी,खुशबू नितिन साहू,रिंकी राजू साहू, स्वाति प्रिंस अग्रवाल, जयंती राजकुमार साहू,प्रियंका राहुल शर्मा,पुष्पा दयाशंकर मिश्रा,राधा आशीष यादव, सीमा प्रदीप अग्रवाल, एवं रीना अजय अग्रवाल सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञ वेदिका में आहुतियां देकर पुण्य लाभ अर्जित किया। तथा पार्थिव शिवलिंग निर्माण कर विधि-विधान से उनका पूजन अर्चन कर आरती उतारी। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।अंत में बृजेश नारायण अगरिया ने सभी का आभार व्यक्त किया।
सायंकालीन वेला में
श्री खाती बाबा का अभिषेक एवं रुद्राभिषेक कर मन
मोहक श्रृंगार कर उनकी आरती की गयी।
