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गुरु:ब्रम्हा!गुरू विष्णु!!गुरू देवोः महेश्वराः!!!…… -कुंजबिहारी मंदिर में गुरुपूजन को शिष्यों का सैलाव उमडा रिपोर्ट: अनिल मौर्य

झांसी। गुरु में आकर्षण है, आसक्ति नहीं, ममता है पर मोह नहीं,समता है पर शाेक नहीं, प्रशस्त नेह है पर गेह नहीं, चिंतन है पर चिंता नहीं। चित्त में निर्मलता है ,मलिनता नहीं। गुरुओं की देह से धवल कांति दूर- दूर तक प्रवाहित होती रहती है।यह सब साधु चर्या के गुण हैं। गुरु ही ब्रम्हा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही परम ब्रम्ह है। सोमवार को गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर महानगर के विभिन्न मंदिरों तथा गुरुओं के आश्रमों में गुरुपूजन एवं दर्शनों के लिए शिष्यों की भीड उमड पडी। सिविल लाइन ग्वालियर रोड स्थित कुंज बिहारी मंदिर में प्रातः से हजारों श्रद्धालुओं की भीड एकत्रित हो गई। भगवान कुंजबिहारी सरकार की आरती उपरांत गुरुपूजन का सिलसिला प्रारम्भ हुआ जो दिन भर चलता रहा।कुंजबिहारी मंदिर में नित्यलीला निकुंज गौलोक वासी पूज्य गुरुदेव भगवान महंत बिहारीदास महाराज के चित्र का पूजन कर श्रद्धालु शिष्यों नेक्षबुंदेलखण्ड धर्माचार्य महंत राधामोहन दास महाराज का अंगूठा धोकर चरणामृत लिया फिर रोली चंदन का टीका लगाया, अंगवस्त्र, फल एवं मिष्ठान भेंट करते हुए माल्यार्पण कर आरती उतारकर आशीर्वाद लिया।बुंदेलखण्ड धर्माचार्य महंत राधामोहन दास महाराज ने सभी शिष्यों को शुभाशीष देते हुए कहा कि सभी धर्म का पालन करते हुए स्वयं को सतकर्मों में लगायें और यथासंभव गरीबों तथा बेसहारा लोगों की मदद अवश्य करो। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का पालन करते हुए गाय, गीता, गंगा को श्रेष्ठ मानों तथा अपने से बडों का तथा नारी शक्ति का सदैव सम्मान करने की आदत डालें। प्रातःकालीन वेला में मंदिर में विराजमान राज राजेश्वरी राधारानी, प्रियतम प्यारे कुंजबिहारी सरकार सहित सभी विग्रहों का विधि विधान से पूजन उपरांत अभिषेक एवं मनमोहक श्रृंगार किया गया।ख्याति प्राप्त कलाकारों ने गुरु महिमा का बखान करते सुंदर भजन सुनाये। मनु महाराज,पवनदास एवं बालकदास महाराज ने सभी व्यवस्था संचालन में योगदान किया।

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