डा. राधाकृष्णन के आदर्शो को आत्मसात करने पर जोर

शिक्षक दिवस पर हिंदी संस्थान
में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम

झांसी। देश के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर मंगलवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस मौके पर अनेक शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया। सभी वक्ताओं ने डा. राधाकृष्णन के आदर्शो को आत्मसात करने पर जोर दिया।
बुविवि के हिंदी संस्थान के डा. वृंदावन लाल वर्मा सभागार में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात कथाकार प्रोफेसर देवेंद्र नाथ ने कहा कि दुनिया का हर शिक्षक अपने शिष्यों की वजह से ही जाने जाते हैं। अपनी किताबों की वजह से नहीं। एक शिक्षक की मुक्ति योग्य शिष्य के बगैर नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और विनम्रता दोनों गुरु कृपा से ही मिलती है। सत गुरु शब्द का प्रयोग क्यों इस तथ्य को भी उन्होंने रेखांकित किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो अश्विनी शुक्ल रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा,शिक्षक और शिक्षार्थी के विविध श्रेष्ठ आयामों को हम अपनी भारतीय संस्कृति में देख चुके हैं। उन्होंने डा एपीजे कलाम को भी याद किया। राधाकृष्णन जी के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने शांति में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया। प्रो शुक्ल ने बेहतर समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका को भी रेखांकित किया।
शुरू में सभी अतिथियों ने मां सरस्वती और डा. राधाकृष्णन के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो सीबी सिंह ने की। उन्होंने सभी शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने गुरु की महिमा को भी रेखांकित किया।  प्रो सिंह ने सभी शिक्षकों से अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
यह कार्यक्रम कला संकाय और डा मनुजी स्मृति ट्रस्ट, झांसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
शुरुआत में कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो मुन्ना तिवारी ने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने सभी को शिक्षक दिवस की बधाई भी दी। कार्यक्रम का संचालन डा. अचला पाण्डेय ने किया।
इस कार्यक्रम में डा. दीप्ति और डा ऋतु ने भी विचार रखे। उन्होंने शिक्षक की भूमिका पर चर्चा की।
इन शिक्षकों का हुआ सम्मान
इस कार्यक्रम में अर्थशास्त्र विभाग के प्रो सीबी सिंह, डा शंभूनाथ सिंह, डा अतुल गोयल, डा इरा तिवारी, डा ज्योति मिश्रा, डा ऋतु सिंह, डा काव्या दुबे, डा सुनील त्रिवेदी, डा रश्मि सिंह, डा धीरेंद्र यादव, डा दीप्ति, डा भुवनेश्वर, डा संजय कुमार, डा अनूप कुमार, डा यतींद्र मिश्र, डा नेहा मिश्रा, डा स्वप्ना सक्सेना, डा उपेंद्र सिंह तोमर, डा राजीव बबेले, डा के एल सोनकर, डा श्वेता पाण्डेय, डा सुनीता, डा अजय कुमार गुप्त, डा ब्रजेश कुमार, दिलीप कुमार, गजेन्द्र सिंह, डा ज्योति गुप्ता, डा रानी शर्मा,डा अंकिता शर्मा, डा संतोष,  डा महेंद्र कुमार, डा सुषमा अग्रवाल, डा शिखा खरे,डा प्रतिभा, डा अनीता, डा राधा, जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के समन्वयक डा जय सिंह, डा कौशल त्रिपाठी, उमेश शुक्ल, डा राघवेन्द्र दीक्षित,डा अभिषेक कुमार, डा पूजा निरंजन, डा रश्मि जोशी, डा श्रीहरि त्रिपाठी, डा पुनीत श्रीवास्तव, डा प्रेमलता, डा सुनीता वर्मा, डा सुधा दीक्षित, डा अचला पाण्डेय,डा नवीन चंद पटेल समेत अनेक शिक्षक शिक्षिकाओं को प्रशस्ति पत्र और शाल भेंटकर सम्मानित किया गया। डा द्युतिमालिन को भी सम्मानित किया गया। अंत में डा श्रीहरि त्रिपाठी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
वहीं, जन संचार और पत्रकारिता संस्थान में समन्वयक डा. जय सिंह की अध्यक्षता में विशेप कार्यक्रम आ आआयोजित किया गया। इसमें शिक्षक उमेश शुक्ल, डा. राघवेन्द्र दीक्षित, डा. अभिषेक कुमार ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों और सभी ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों से डा राधाकृष्णन के आदर्शो को आत्मसात करने का आह्वान किया।
ललित कला संस्थान में समन्वयक डा सुनीता के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में कला संकाय अधिष्ठाता प्रो मुन्ना तिवारी मुख्य अतिथि रहे। सभी ने केक काटकर शिक्षक दिवस मनाया। इसी मौके पर बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए अतीत विजय को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में डा अजय गुप्ता, डा श्वेता पाण्डेय, डा राघवेन्द्र दीक्षित आदि मौजूद रहे।

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