झाँसी-बेतवा के लिए मेरी आवाज़ गूँजती रहेगी-भानू सहाय
झाँसी- कहते हैं कि कश्तियां उनकी ही किनारे पर लगती हैं , जिनके हौसले उनके जज्बे को बुलंद बनाए रखते हैं । आवाज़ भी उनकी फिजा में तब तक तैरती है जब तक आसमां से मसीहा मदद की बागडोर हाथ में लिए सामने नहीं आता। युवा समाजसेवी भानू सहाय भले ही गरीब कमजोर और बेबस…
