गुरु:ब्रम्हा!गुरू विष्णु!!गुरू देवोः महेश्वराः!!!…… -कुंजबिहारी मंदिर में गुरुपूजन को शिष्यों का सैलाव उमडा रिपोर्ट: अनिल मौर्य
झांसी। गुरु में आकर्षण है, आसक्ति नहीं, ममता है पर मोह नहीं,समता है पर शाेक नहीं, प्रशस्त नेह है पर गेह नहीं, चिंतन है पर चिंता नहीं। चित्त में निर्मलता है ,मलिनता नहीं। गुरुओं की देह से धवल कांति दूर- दूर तक प्रवाहित होती रहती है।यह सब साधु चर्या के गुण हैं। गुरु ही ब्रम्हा…
