झांसीः अभी खाली है, चलो मंदिर-मस्जिद सर झुका आते हैं
झांसीः नेताआंे का भी ना। इन्हंे मौका देखकर धर्म, मजहब, जात, रिश्तेदारी, मित्र, जनता यहां तक कि मंदिर-मस्जिद भी अच्छे लगने लगते। फिर सब इन्हंे तलाशे? सिर्फ एक को छोड़कर। जो मंदिर मंे है, मस्जिद मं है और हर जगह है। उसकी तलाश अचानक करने से क्या वो सुनेगा? चुनावी दौर चल रहा है। सभी…
