झांसी-तनाव नहीं झेल पाया लेखपाल, सल्फास खाया

झांसीः कहते है कि तनाव बुरी चीज है। तनाव मे व्यक्ति सोचने की क्षमता खो देता है। फिर तनाव यदि पारिवारिक हो, तो व्यक्ति की स्थिति और खराब हो जाती है। इसी तनाव मे गुजर रहे एक लेखपाल ने सल्फास का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कालेज लाया गया। महोबा के ग्राम…

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लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कल तक स्थगित हुई

नयी दिल्ली- लोकसभा की कार्यवाही कल तक स्थगित हुई, 20 सितंबर तक लोकसभा की कार्यवाही स्थगित… अपडेट – राज्य सभा की कार्यवाही भी कल तक स्थगित हुई, 20 सितंबर तक राज्य सभा की कार्यवाही स्थगित। महिला आरक्षण बिल लोक सभा मे पेश. आरक्षण की अवधि 15 साल होगी.543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के…

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कोंच-पुलिस ने फिर मारा कबूतरा डेरा पर छापा,50 लीटर कच्ची शराब बरामद, रिपोर्ट-नवीन कुशवाहा

कोंच (जालौन)। पुलिस अधीक्षक के कड़े निदेश में शनिवार को मिलावटी कच्ची शराब पर रोक लगाये जाने के तहत स्थानीय क्षेत्राधिकारी शीशराम सिंह के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस ने नगर के महेशपुरा रोड पर डेरा जमाये कबूतरों के अडडे पर छापा मार कार्यवाही की। कार्यवाही के दौरान पुलिस ने अबैध रूप से कच्ची शराब बनाने…

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राम मोहम्मद सिंह आज़ाद को हार्दिक भावभीनी श्रृध्दान्जली।

आपको पढ़कर अचरज हो रहा होगा, यह भला कैसा नाम है? वह हिंदू थे या मुसलमान? मैं उसकी चर्चा क्यों कर रहा हूं? कौन था यह शख्स? बताता चलूं। सरदार उधम सिंह (26 दिसम्बर 1899 से 31 जुलाई 1940) का नाम भारत की आज़ादी की लड़ाई में पंजाब के क्रान्तिकारी के रूप में दर्ज है। आज उनकी 119वीं जयन्ती है । सरदार उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को एक सिख परिवार में पंजाब राज्य के संगरूर जिले के सुनाम गाँव में हुआ था | सरदार उधम सिंह की माँ का उनके जन्म के दो वर्ष बाद 1901 में देहांत हो गया था और पिताजी सरदार तेजपाल सिंह रेलवे में कर्मचारी थेजिनका उधम सिंह के जन्म के 8 साल बाद 1907 में देहांत हो गया था | इस तरह केवल 8 वर्ष की उम्र के उनके सर से माता पिता का साया उठ चूका था | अब उनके माता पिता की मृत्यु के बाद उनके बड़े भाई मुक्ता सिंह उधम सिंह को अमृतसर के खालसा अनाथालय में दाखिला कराया | शहीद उधम सिंह का बचपन में नाम शेर सिंह था लेकिन अनाथालय में सिख दीक्षा संस्कार देकर उनको उधम सिंह नाम दिया गया | 1918 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया | 13 अप्रैल 1919 को स्थानीय नेताओ ने अंग्रेजो के रोलेट एक्ट के विरोध में जलियावाला बाग़ में एक विशाल सभा का आयोजन किया था | इस रोलेट एक्ट के कारण भारतीयों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा था | अमृतसर के जलियावाला बाग़ में उस समय लगभग 20000 निहत्थे प्रदर्शनकारी जमा हुए थे | उस समय उधम सिंह उस विशाल सभा के लिए पानी की व्यवस्था में लगे हुए थे | जब अंग्रेज जनरल डायर को जलियावाला बाग़ में विद्रोह का पता चला तो उसने विद्रोह का दमन करने के लिए अपनी सेना को बिना किसी पूर्व सुचना के निहत्थे प्रदर्शनकारीयो पर अंधाधुंध गोलिया चलाने का आदेश दिया | अब डायर के आदेश पर डायर की सेना ने 15 मिनट में 1650 राउंड गोलिया चलाई थी | जब गोलिया चली तब जलियावाला बाग़ में प्रवेश करने और बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था और चारो तरफ से चाहरदीवारी से घिरा हुआ था | उस छोटे से दरवाजे पर भी जनरल डायर ने तोप लगवा दी थी और जो भी बाहर निकलने का प्रयास करता उसे तोप सेउड़ा दिया जाता था | अब लोगो के लिए बाहर निकलने का कोई रास्ता नही था और लगभग 3000 निहत्थे लोग उस भारी नरसंहार में मारे गये थे | उस जलियावाला बाग़ में एक कुंवा था लोग अपनी जान बचाने के लिए उस कुंवे में कूद गये लेकिन कुंवे में बचने के बजायलाशो का ढेर लग गया | इसके बाद भी जब जनरल डायर वहां से निकलते वक़्त अमृतसर की गलियों में भारतीयों को गोलियां मारते हुए गया | उस नरसंहार में शहीद उधम सिंह  जीवित बच गये थे और उन्होंने अपनी आँखों से ये नरसंहार देखा था जिससे उन्हें भारी आघात लगा | उधम सिंह उस समय लगभग 11-12 वर्ष के थे और इतनी कम उम्र में उन्होंने संकल्प लिया कि “जिस डायर ने क्रूरता के साथ मेरे देश केनागरिको की हत्या की है इस डायर को मै जीवित नही छोडूंगा और यही मेरे जीवन का आखिरी संकल्प है ” | अब उधम सिंह अपने संकल्प को पूरा करने के लिए 1924 में वो ग़दर पार्टी में शामिल हो गये और भगत सिंह के पद चिन्हों पर चलने लगे | वह भारत की दुर्दशा के लिए ज़िम्मेदार कापुरुषता, सांप्रदायिकता और सामाजिक बिखराव को रोज़-ब-रोज़ पढ़ते गए, गुनते गए। इसीलिए भारतीय श्रमिक संघ और हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन में काम करते हुए उन्होंने अपना नाम राम मोहम्मद सिंहआज़ाद रख लिया। जो साम्प्रदायिक एकता का प्रतीक बना । अब उन्होंने विदेश जाने का विचार किया क्योंकि उनको वहां से असलहा गोला बारूद लाना था | इसके लिए उनके पास धन नहीं  था। तो उन्होंने धन इकट्ठा करने के लिए बढ़ई का काम करना शुरू कर दिया था | लकड़ी का काम करते करते उन्होंने इतना पैसा कमा लिया किवो विदेश चले  गये ।  भगत सिंह के कहने पर वो विदेश से हथियार लेकर आये लेकिन बिना लाइसेंस हथियार रखने के जुर्म में उनको पांच वर्ष की सज़ा हो गयी | 1931 में उनकी रिहाई हो गयी और अब उन्होंने फिर विदेश जाकर हथियार लाने की योजना बनाई | इस बार वो पुलिस को चकमा देकर पहले कश्मीर पहुंचे और वहाँ से जर्मनी चले गये | 1934 से जर्मनी से लन्दन पहुंच गये और लन्दन में जाकर उन्होंने एक होटल में वेटर का काम किया  ताकि कुछ ओर पैसे इकट्ठे कर बन्दुक़ ख़रीदी जा सके | उनको ये सब काम करने मेंपुरे 21 साल लग गये । फिर भी उनके मन में प्रतिशोध की ज्वाला कम नही हुयी थी | ज़रा सोचिए, एक अनाथ नौजवान, जिसके पल्ले में कुछ न हो, वह यूरोपीय और अफ्रीकी देशों से होता हुआ लंदन पहुंचता है। वहां मकान किराये पर लेता है। एक कार खरीदता है और साथ ही रिवॉल्वर भी। वह अपनी योजनाओं को अमली जामा पहना पाते, इससे पहलेजनरल डायर अपनी मौत मर गया, पर हत्याकांड का हुक्मनामा जारी करने वाला उसका बॉस यानी लेफ्टिनेंट गर्वनर सर माइकल ओडवायर ज़िंदा था। उधम सिंह ने उसके वध का फैसला किया। एक दिन उन्हें मालूम पड़ा कि ओडवायर रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की सभा में भाग लेने के लिए लंदन के कैक्सटन हॉल में आने वाला है। उन्होंने एक मोटी किताब को बीच में से इस तरह काटा कि उसमें रिवॉल्वर समा सके। अगले कुछ घंटे उनका मनोरथ साधने वालेसाबित हुए। पर यह सच है कि इस कांड के बाद वह जीते जी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सितारे बन गए। 31 जुलाई, 1940 को बरतानिया की पेंटनविले जेल में उन्हें फांसी दे दी गई थी। उम्र- 40 साल। आरोप- हत्या, राष्ट्रद्रोह आदि- सर्वाधिक संगीन मामलों में सज़ा-ए-मौत दी गई । उधम सिंह के प्रशंसक कहते हैं कि उन्होंने खुद को इसलिए गिरफ्तार करवा दिया था, ताकि उनका संदेश पूरी दुनिया तक पहुंच सके। ऐसा करते वक्त यक़ीनन उन्हें मालूम था कि अंग्रेज सूली पर चढ़ा देंगे। हो सकता है कि उनके प्रशंसक इस मामले में अतिरेक करते हों, परयह सच है कि उसी कालखंड में भगत सिंह और उनके साथियों ने असेंबली में इस नीयत से बम फेंका था, ताकि बहरे भी सुन सकें। वे इसका अंजाम जानते थे।…

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राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होंगे अखिलेश

लखनऊ- राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होंगे अखिलेश यादव,अमेठी,रायबरेली में राहुल गांधी के साथ शामिल होंगे अखिलेश,मल्लिकार्जुन खड़गे का निमंत्रण अखिलेश ने स्वीकार किया,अखिलेश ने कांग्रेस को बधाई देते हुए निमंत्रण स्वीकार किया,16 फरवरी को उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी कांग्रेस की यात्रा,आशा है ये भारत जोड़ो न्याय यात्रा आगे ले जाएगी-अखिलेश,यात्रा PDA…

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मानसून की बारिश से मुंबई का बुरा हाल, लोकल ट्रेनों की गति भी धीमी हुई, रिपोर्ट-अमित

28 जून। शुक्रवार को बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत दी जोरदार बारिश का मुंबई वासियों ने स्वागत किया, लेकिन मुसीबत में भी फस गए . जगह-जगह जलभराव के कारण लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जलभराव के चलते कई जगह जाम लग गया है . बारिश के कारण मुंबई…

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तन सही, तो मन सही

झाँसी । जे सी आई झाँसी ग्रेटर के तत्वावधान में जे सी वीक 2017 *The 7 day splash* ke अंतर्गत प्रथम दिवस *wellness day* पर मुक्ताकाशी मंच के समीप निःशुल्क स्वास्थ शिविर का आयोजन किया गया…जिसमे डॉ.विकास गोयल (पैथोलॉजी) एवं डॉ.नेहा गोयल (डेंटिस्ट) द्वारा करीब 100 से भी ज्यादा मरीजों का प्रशिक्षण किया गया। साथ…

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अपने बच्चे को बचाने सांप से भिड़ गई कुतिया, जाने क्या हुआ?

पटना 30 अक्टूबरः अपने बच्चे को बचाने के लिये एक कुतिया जहरीले सांप से भिड़ गयी। दोनो मे  जमकर युद्व हुआ। आखिर मे  दोनो ही  मौत के मुंह मे  समा गये। बिहार के रोहतास जिला के अकोढ़ीगोला प्रखंड स्थित बांक गांव मे  एक कुतिया ने अपने बच्चे के करीब जब सांप को आते देखा, तो…

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वन्देमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आज झांसी दुर्ग के नीचे जनरल विपिन रावत पार्क मैं बच्चों द्वारा गाया गया वन्देमातरम गीत

आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा झांसी महानगर के जिला अध्यक्ष हेमंत परिहार के नेतृत्व में एवं मुख्य अतिथि के तौर पर रविन्द्र शुक्ल, सांसद अनुराग शर्मा मेयर बिहारी लाल आर्य, रमा निरंजन, बाबूलाल तिवारी, रामतीर्थ सिंघल, रामनरेश तिवारी, पवन गौतम, कार्यक्रम के संयोजक प्रदीप सरावगी एवं समस्त भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता एवं…

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अगस्ता डील को लेकर सोनिया और अहमद पटेल को फंसाने का नया खुलासा

नई दिल्ली 31 जुलाई-अगस्ता डील मामले मे एक बार फिर से कांग्रेस की सोनिया गांधी और उनके सलाहाकर अहमद पटेल को फंसाने का खुलासा हुआ है। इस मामले मे कथित बिचैलिये मिशेल ने दावा किया कि उसे दोनो  का नाम लेने के लिये अधिकारियो ने दवाब मे लिया था। जमानत मिलने के बाद मिशेल ने…

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