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आखिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में खामोश क्यों रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

नई दिल्ली 17 मई । भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने आज जब भाजपा कार्यालय पर मीडिया को संबोधित किया ,तो उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे । 5 साल में यह पहला मौका था जब प्रधानमंत्री किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित हुई हो, लेकिन सबको इस बात को लेकर हैरानी रही कि मोदी ने पत्रकारों के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. वह खामोश रहे इसको लेकर सियासी गलियारे में चर्चाएं तेज हैं. राजनीतिक जानकार मोदी की इस खामोशी को अपने ही नजरिए से देख रहे हैं.

लोकसभा चुनाव के छह चरण पूरी हो चुकी है. सातवां चरण बाकी है .इसके लिए चुनाव प्रचार थम गया है. आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे, तो सभी की निगाहें इस बात पर थी कि क्या मोदी राहुल गांधी के सवालों का जवाब देंगे या फिर अपने ही अंदाज में विपक्ष को घेरने की कोशिश करेंगे . सभी यह आकलन ही करते रह गए, लेकिन मोदी ने किसी की भी सवाल का कोई जवाब नहीं दिया.

उन्होंने इतना ही कहा भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और हमें दुनिया को प्रभावित करने की कोशिश जारी रखना चाहिए.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोशी ने विपक्ष को घेरने का मौका दे दिया , तो वही राजनीतिक जानकार उनकी खामोशी को अपने ही नजरिए से देख रहे हैं .राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोदी अंदर ही अंदर इस बात को लेकर चिंतित है कि जनादेश कहीं खंडित ना हो जाए .

शायद यही कारण है कि वह लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि एक बार फिर से मोदी सरकार बन रही है.

वही आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही दूसरी ओर मीडिया से बात कर रहे कांग्रेसी अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी को सवालों के घेरे में लिया और पूछा की क्यों वह राफेल मामले में उनके सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं और राहुल के इस काउंटर का सभी को पीएम की ओर से जवाब आने का इंतजार था लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि मोदी और शाह की जोड़ी बार-बार यह कहकर अपनी कमजोरी को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं कि एक बार फिर मोदी सरकार बन रही है शायद वह अंदर ही अंदर समझ रहे हैं कि महागठबंधन इस बार कुछ अधिक ही सीटें ले सकता है। इसके अलावा जिस प्रकार से कांग्रेसमें चुनावी मैदान में अपने आप को खड़ा किया है उससे भी भाजपा खेमे में खांसी हलचल है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि 23 मई को जब नतीजे सामने आएंगे तो क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह की खामोशी सभी को चकित कर देगी या फिर इस खामोशी के राज 23 के इसके बाद खुलेंगे?

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