नई दिल्ली 24 जुलाई । सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें मामले को नया मोड़ दे दिया है ।
दलील में कहा गया है कि मस्जिदों में भी महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है तब एक याचिका के आधार पर क्यों मंदिर के मामले में सुनवाई हो रही है। समानता के अधिकार का उल्लंघन मस्जिदों पर भी लागू होता है।
सिंघवी ने कोर्ट से पूछा है कि देश के शिया मुस्लिम मुहर्रम में अपने शरीर को हथियारों के वार से लहूलुहान कर लेते हैं. देश में काली के कई ऐसे मंदिर हैं जहां त्वचा में कांटे चुभाए जाते हैं. श्रद्धालु त्वचा में कीलें चुभा कर खुद को लटकाते हैं. क्या सुप्रीम कोर्ट तरक्की पसंद होने के नाते इस पर भी रोक लगाएगी ?
त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने 10 से 55 साल के बीच की उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को उचित बताते हुए कहा कि वहां कई ऐसी अनोखे रीति रिवाज और विधि विधान हैं जिसपर हिंदू ही नहीं गैर हिंदू जन भी आस्था रखते हैं. लिहाजा महज एक जनहित याचिका के आधार पर हिंदू धर्म को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
