झाँसी। आज महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हृदय रोगियों को एंजियोप्लास्टी के दौरान उपलब्ध कराए जाने वाले कोरोनरी स्टेंट की कीमतों तथा पात्र मरीजों को शासन की असाध्य रोग निःशुल्क उपचार योजना का लाभ दिए जाने के संबंध में आज पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन ‘आदित्य’ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार तथा हृदय रोग विभाग के यूनिट प्रभारी डॉ. कुलदीप चंदेल से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन के समक्ष स्टेंट की कीमत, सरकारी खरीद व्यवस्था, मरीजों से की जा रही वसूली तथा असाध्य रोग योजना के अंतर्गत उपलब्ध धनराशि के उपयोग सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की।
पूर्व मंत्री प्रदीप जैन ‘आदित्य’ ने कहा कि हृदय रोग शासन की असाध्य रोग निःशुल्क उपचार व्यवस्था में शामिल है और आर्थिक रूप से कमजोर पात्र मरीजों को जीवनरक्षक उपचार केवल पैसे के अभाव में नहीं रुकना चाहिए। ऐसे मरीजों के लिए शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निधि और निर्धारित प्रक्रिया का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में कोरोनरी स्टेंट की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार के एन पी पी ए द्वारा स्पष्ट मूल्य-नियमन व्यवस्था लागू है। वर्तमान में 1 अप्रैल 2026 से एन पी पी द्वारा बायर मेटल स्टेंट का बिक्री मूल्य 10, 6720 प्रति स्टेंट तथा डी ई एस एस स्टेंट का बिक्री मूल्य 39,186 प्रति स्टेंट जी इस टी को छोड़कर निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि इस्तेमाल किया जा रहा स्टेंट कौन-सा है, उसका निर्माता एवं मॉडल क्या है, उसकी एम आर पी क्या है। मेडिकल कॉलेज ने उसे किस दर पर खरीदा है और मरीज से कितनी राशि ली जा रही है।स्टेंट के नाम पर मरीजों से स्टेंट के नाम पर मनमानी वसूली बंद हो
पूर्व मंत्री प्रदीप जैन ‘आदित्य’ ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से कहा कि यदि किसी मरीज से स्टेंट की कीमत ली जा रही है तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और मरीज को बिल में स्टेंट का ब्रांड, निर्माता/आयातक, बैच नंबर, और अलग से उसकी कीमत उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इन पी पी की व्यवस्था में अस्पतालों द्वारा कोरोनरी स्टेंट की लागत को बिल में अलग से दर्शाने और आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने पर पहले से स्पष्ट निर्देश हैं।
उन्होंने कहा कि मरीजों से स्टेंट के नाम पर ऐसी कोई राशि नहीं ली जानी चाहिए जो लागू नियमों एवं एन पी पी ए द्वारा निर्धारित मूल्य-व्यवस्था के विपरीत हो। साथ ही, जो मरीज असाध्य रोग निःशुल्क उपचार योजना की पात्रता पूरी करते हैं, उनके लिए योजना के अंतर्गत उपलब्ध वित्तीय प्रावधानों का उपयोग किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने मेडिकल कॉलेज में पूर्व में असाध्य रोगों के निःशुल्क उपचार के लिए उपलब्ध कराई गई लगभग ₹3 करोड़ की राशि का भी मुद्दा उठाया।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इस राशि तथा वर्तमान में उपलब्ध/स्वीकृत असाध्य रोग निधि के संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए ।
पूर्व मंत्री प्रदीप जैन ‘आदित्य’ ने कहा कि यदि शासन ने गरीब और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार के लिए धनराशि उपलब्ध कराई है तो उसका उद्देश्य मरीजों तक पहुँचना होना चाहिए और इसकी जानकारी अस्पताल परिसर में प्रमुखता से प्रदर्शित की जानी चाहिए।योजना की जानकारी का व्यापक प्रचार हो।
उन्होंने यह भी मांग की कि मेडिकल कॉलेज में असाध्य रोग निःशुल्क उपचार योजना की पात्रता, उपलब्ध उपचार, आवेदन की प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण अस्पताल परिसर में प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए, ताकि गरीब मरीजों और उनके परिजनों को जानकारी के अभाव में निजी खर्च उठाने के लिए मजबूर न होना पड़े।उन्होंने कहा कि इस संबंध में महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, उत्तर प्रदेश को भी ज्ञापन भेजा जाएगा और मेडिकल कॉलेज प्रशासन से अपेक्षा की जाएगी कि स्टेंट और असाध्य रोग निधि के उपयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराए।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पात्र मरीजों से नियमों के विपरीत स्टेंट के नाम पर वसूली जारी रहती है अथवा शासन की निःशुल्क उपचार व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होता है, तो इस विषय को संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा और आवश्यकतानुसार व्यापक जनहित अभियान चलाया जाएगा।
प्रतिनिधि मण्डल में राजेंद्र शर्मा सीनियर एडवोकेट,राजेन्द्र सिंह यादव,आशु ठाकुर,अनिल रिछारिया,अमीर चंद आर्य,मयंक शर्मा व सिराज खान आदि शामिल रहें।
