*झांसी।* लिटिल लाइफ पब्लिक स्कूल, टैक्सी स्टैंड पुलिया नं. 9 पर 04 अक्टूबर को जश्न-ए-गौस-उल-वरा व जश्न-ए-शाह सकलैनी शराफत रहमतुल्लाह अलैह बड़ी अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया।
जलसे को खिताब करते हुए उलमा-ए-किराम ने कहा कि कुरआन-ए-करीम की पहली वह्यी का आगाज़ “इक़रा” यानी “पढ़ो” के पैगाम से हुआ। सूरह अल-अलक की पहली आयत “इक़रा बिस्मि रब्बिकल्लज़ी ख़लक” यानी “पढ़ो अपने उस रब के नाम से जिसने पैदा किया” इंसान को इल्म हासिल करने और उसे सही दिशा में इस्तेमाल करने की प्रेरणा देती है।
वक्ताओं ने कहा कि इस्लामी परम्परा में इल्म को हमेशा अहम मकाम हासिल रहा है। इसी सिलसिले में हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी गौस-ए-पाक रहमतुल्लाह अलैह की तालीम में भी इल्म के साथ अच्छे अखलाक, नेक अमल और इंसानियत की खिदमत पर जोर दिया गया है। उनकी तालीम यही पैगाम देती है कि हासिल किया गया इल्म इंसान के किरदार और अमल में नजर आना चाहिए।
कार्यक्रम में सुबह 10 बजे से 12 बजे तक जलसा हुआ और 12:15 बजे फातिहा ख्वानी हुई।
इस मौके पर हाजी अब्दुल वहीद सकलैनी, अब्दुल जाहिद सकलैनी, मो. नहीद सकलैनी, मो. रईस, कप्तान अंसार सकलैनी, हामिद भाई, अशफाक सकलैनी, ननकू भाई, चांद भाई, अनीस सकलैनी, मोहम्मद अली सकलैनी, हाशिम सकलैनी बरेली, मोहम्मद नूरैन, मोहम्मद हसनैन, सलमान खान, मोहम्मद रेहान व कमेटी के दीगर मेंबर मौजूद रहे।
