“झांसी में ‘हिन्दू बेटी बचाओ संघर्ष समिति’ का ज्ञापन: सामाजिक सुरक्षा और कड़े कानूनों की उठी मांग”
झाँसी। जनपद में सामाजिक सुरक्षा, महिला संरक्षण और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की मांग को लेकर हिन्दू बेटी बचाओ संघर्ष समिति, झांसी द्वारा एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया। इसके पूर्व मुक्ताकाशी मंच पर एक महापंचायत का आयोजन किया गया जिसमें जनपद के विभिन्न हिंदूवादी एवं अन्य सामाजिक संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, दीप प्रज्वलन में मुख्य रूप से नीरज गुप्ता प्रांत सयोजक, डॉ संदीप सरावगी, आशीष उपाध्याय, जयदीप खरे, पीयूष रावत, सक्षम जी जिला प्रचारक, सोमेंद्र जी विश्व हिन्दू परिषद,
सौरव जी हिन्दू जागरण मंच आदि उपस्थित रहे।
ज्ञापन में तथाकथित “लव जिहाद” से जुड़े मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कठोर विधिक एवं प्रशासनिक प्रावधान लागू करने की मांग की गई है। समिति ने अपने ज्ञापन में कहा कि राज्य में छल, प्रलोभन अथवा दबाव के माध्यम से होने वाले कथित धर्मांतरण और उससे जुड़े अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है, ताकि सामाजिक संतुलन एवं जन-सुरक्षा को मजबूती मिल सके। इसी क्रम में कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।
ज्ञापन में प्रत्येक जनपद में ऐसे मामलों की सुनवाई हेतु विशेष पुलिस थानों की स्थापना और गहन जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट के गठन की मांग की गई है। साथ ही मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक न्यायालयों की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें छह माह के भीतर ट्रायल पूर्ण करने की व्यवस्था हो।
समिति ने इस प्रकार की गतिविधियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले व्यक्तियों जैसे षड्यंत्रकर्ता, आर्थिक सहायता देने वाले और फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की बात कही है। इन अपराधों को संगठित अपराध की श्रेणी में रखते हुए सख्त कानून लागू करने का आग्रह भी किया गया।
ज्ञापन में फर्जी पहचान के उपयोग को विशेष अपराध घोषित करने, अभिभावकों की जिम्मेदारी तय करने तथा अंतरधार्मिक अथवा प्रेम विवाह के मामलों में पूर्व सूचना देना अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त विवाह की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए दो स्वतंत्र साक्षियों की अनिवार्यता और महिला सुरक्षा के मद्देनजर जिम, सैलून एवं मसाज सेंटरों के नियमन की भी मांग उठाई गई।
समिति ने समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन पर भी जोर देते हुए विवाह एवं पारिवारिक मामलों में समानता, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही विदेश भेजे जाने की स्थिति में महिलाओं की सुरक्षा हेतु पूर्व सूचना, सत्यापन और निगरानी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में रजनी वर्मा, रंजना वर्मा, जीतू सोनी, मोहित अग्रवाल, रोहित महरौलिया, अरुण कुशवाहा, हर्षित, अनुज, सुमित विश्वकर्मा, पुरुषोत्तम स्वामी, उपेंद्र बबेले, वासु पोखरेल, जीतू शिवहरे, राघव वर्मा, संजय राष्ट्रवादी, पुरुकेष अमरया आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ज्ञापन के अंत में समिति ने इन सभी प्रस्तावों को लागू कर राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। यह ज्ञापन सामाजिक सरोकारों और सुरक्षा के मुद्दों को लेकर उठाई गई एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
