डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’: सुवेंदु अधिकारी का वो 3D फॉर्मूला क्या? जिसेस खौफ में बांग्लादेशी घुसपैठिए

*‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’: सुवेंदु अधिकारी का वो 3D फॉर्मूला क्या? जिसेस खौफ में बांग्लादेशी घुसपैठिए*

*शुभेन्दु सरकार बॉर्डर पश्चिम बंगाल की जमीन तारबंदी के लिए देने को तैयार, अब घुसपैठ रुक जाएगी*

*बंगाल मॉडल: डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति*
* शुभेन्दु सरकार ने अवैध घुसपैठ पर सख्त कार्रवाई की मांग की
* फर्जी दस्तावेज़ और अवैध बस्तियों की पहचान करने पर जोर
* सत्यापन के बाद वोटर लिस्ट और सरकारी रिकॉर्ड से नाम हटाने की मांग
* अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत डिपोर्ट करने की बात
* सीमा सुरक्षा और पहचान सत्यापन को मजबूत करने पर फोकस
* राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन की चिंता
* फर्जी दस्तावेज़ बनाने वाले गिरोहों और बिचौलियों पर कार्रवाई
* अवैध घुसपैठ के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
*“डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट” मॉडल को देशभर में लागू करने की मांग*

● पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घुसपैठियों के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति का ऐलान किया है.
● सरकार के मुताबिक अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लेकर BSF को सौंपा जाएगा.
● इसके बाद उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी.
● CAA के तहत आने वाले समुदायों को इस कार्रवाई से बाहर रखा गया है.
● सरकार ने सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए BSF को 27 किलोमीटर जमीन देने का भी फैसला किया है.
● इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में घुसपैठ और रोहिंग्या का मुद्दा फिर गर्म हो गया है.

*दावा किया जा रहा है कि इससे अवैध घुसपैठ पर बड़ी चोट पड़ेगी. खासकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए गए हैं. बीजेपी लंबे समय से इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन का मुद्दा बताती रही है. अब राज्य सरकार खुलकर उसी लाइन पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है. सीमा सुरक्षा बल यानी BSF को भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. 27 किलोमीटर जमीन सौंपने और बॉर्डर फेंसिंग तेज करने का फैसला बताता है कि सरकार इस बार सिर्फ बयानबाजी नहीं बल्कि जमीनी कार्रवाई के मूड में है.*

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