देहरादून! भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक पद्म श्री डॉ. एस.आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस 12 अगस्त के दिन को राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के रूप में मनाया गया, इस अवसर पर डॉ. रंगनाथ ज़ी के चित्र औऱ माल्यार्पण किया गया एवं गणेश वंदना के साथ दीप जला कर गोष्ठी का शुभारम्भ किया गया
डॉ. अनिल कुमार दीक्षित विधि संकायअध्यक्ष,देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी ने अपने सम्बोधन में कहा कि , प्रत्येक पुस्तकालय लोगों को जोड़ने , ज्ञान का संरक्षण करने एवं छात्रों के भविष्य को सशक्त बनाने का काम करते है, डॉ. दीक्षित ने कहा कि डॉ. एस.आर. रंगनाथन पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियमों और पहली बहुआयामी वर्गीकरण प्रणाली के लिए प्रसिद्ध हैं
यूनिवर्सिटी में पुस्तकालय विभाग की अध्यक्ष , रेखा ठाकुर ने डॉ.शियाली रामामृत रंगनाथन ज़ी के जीवन पर प्रकाश ड़ालते हुए कहा कि, भारत में डॉ. रंगनाथन ज़ी को पुस्तकालय विज्ञान का जनक माना जाता है। उनका जन्म तमिलनाडु के शियाली (सिरकाझी) गांव में हुआ था। वे एक महान गणितज्ञ और सूचना वैज्ञानिक थे, जिन्होंने ‘कोलन वर्गीकरण’ और पुस्तकालय विज्ञान के पाँच नियम देकर इस क्षेत्र को नई दिशा दी, रेखा ठाकुर ने बताया कि, वर्ष 1924 में वे मद्रास विश्वविद्यालय के पहले पुस्तकालय अध्यक्ष बने फिर वे पुस्तकालय की आधुनिक कार्यशैली सीखने वे लंदन गए और वहां के अनुभवों को भारत में लागू किया।
यूनिवर्सिटी की डिप्टी लाइब्रेरियन मीनाक्षी राजपूत ने पुस्तकालय में मौजूद किताबो का ब्यौरा प्रस्तुत किया एवं प्रतिदिन छात्र-छात्राओ की पुस्तकालय में पठनीयता पर प्रकाश डाला, इस अवसर पर देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के पाठक छात्र-छात्राओ के साथ साथ विभाग के असिस्टेंट लाइब्रेरीयन आरती बिस्ट, लसीब्रेरियन संजय रांगड़ आदि मौजूद रहे अंत में सहायक लाइब्रेरीयन मीनाक्षी ठाकुर ने विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री संजय बंसल ज़ी एवं उपाध्यक्ष श्री अमन बंसल ज़ी द्वारा यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी को उत्कृष्ट बनाने हेतु संसाधनों की पूर्ति के किये धन्यवाद करते हुए गोष्ठी में मौजूद सभी महानुभावों का आभार व्यक्त किया
