इमाम हुसैन ने सब्र और हिम्मत की मिसाल कायम की : सैय्यद फ़ैज़ हसन

*आस्ताना-ए- सरकारे बांसा अपिया हुजूर में शहादते हुसैन पैगामे कर्बला कांफ्रेंस सम्पन्न*

*झांसी।* मदरसा अल जामियातुल राज्जाकिया सोसायटी आस्ताना-ए- सरकारे बांसा अपिया हुजूर महाराज सिंह नगर पुलिया नंबर 9 झांसी में सूफी मुहम्मद अफराज हुसैन सिद्दीकी कादरी रज्जाकी की अध्यक्षता में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी एक मुहर्रम से नौ मुहर्रम तक शहादत-ए-इमाम हुसैन, पैगाम-ए-कर्बला कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। रविवार को मुख्य रूप से बाराबंकी जिले के मजार सरकार बांसा शरीफ के सज्जादानशीन सैय्यद शाह उमर अहमद जीलानी ने कार्यक्रम का समापन कर
इमाम हुसैन की जिंदगी और इस्लाम को बचाये रखने की फजीलत बयान करते हुए इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत पर मुल्क में अमन चैन और भाई चारा कायम रखने की दुआ मांगी गई व लंगर-ए-आम हुआ।

शहादत-ए-इमाम हुसैन, पैगाम-ए-कर्बला कांफ्रेंस में मौलाना आलिम सैय्यद फ़ैज़ हसन शफीपुर ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन र.अ. ने अपने रिश्तेदारों और साथियों के साथ इस्लाम को क़यामत तक के लिये अमर बना देने के लिए महान बलिदान दिया है। इस रास्ते में इमाम किसी क़ुरबानी से भी पीछे नहीं हटे, यहां तक ​​कि छः महीने के दूध पीते बच्चे को भी इस्लाम के लिए क़ुरबान कर दिया। उन्होंने बताया कि ऐ आशिक़ान-ए-सहाबा व अहले बैत हमें वाक़िआ-ए-कर्बला और इमाम हुसैन र.अ. की शहादत से जहाँ नमाज़ का सीख मिलती है, सब्र व शुक्र की सीख मिलती है, वहीं हमें वाक़िआ-ए-कर्बला और इमाम हुसैन र.अ. की शहादत से यह सीख भी मिलती है कि हक़ को हक़ कहने, समझने और बातिल को बातिल कहने , समझने का हौसला व हिम्मत देता है। और बताया कि यजीद की सेना ने कर्बला को चारों तरफ से घेर रखा था उनकी संख्या हजारों में थी जबकि इमाम हुसैन रहमतुल्ला अलेह के साथ सिर्फ परिवार के लोग और मुट्ठी भर साथी थे इस दौरान इमाम हुसैन ने सब्र और हिम्मत की मिसाल कायम की यह दिन त्याग और कुर्बानी की नींव बना जो हमें हक के रास्ते पर डटे रहे उन्हीं की कुर्बानी में पूरी दुनिया से इंसान का पैगाम दिया। इस अवसर पर हुजूर तहसीन मियां सज्जादा नशीन खानकाहे (जरारी शरीफ), मौलाना आलिम सैय्यद फैज हसन (शफीपुर शरीफ), कारी अजीज अहमद निजामी, सैय्यद सालिम अल्वी, कारी मो0 जमील पेश इमाम (मदीना मस्जिद), कारी निज़ामी मियां बड़ागांव ,मौलाना दाऊद, हाफिज अताउल्लाह साहब , हाफिज मुबारक, मुफ्ती इमरान, शहर काज़ी हाशिम ने इमाम हुसैन रहमतुल्ला अलेह कि शहादत पर विस्तार से रौशनी डाली। इस अवसर पर हाफिज दानिश, हाफिज अजीम, हाफिज इस्लाम, हाफिज आनस चिश्ती, नियाज़ (महोबी), सैय्यद बशारत अली, वहीद भाई, जफर भाई, शफी उल्लाह, अलीम मास्टर, आदिल भाई, चाँद भाई, शमशुल भाई , मेहताब, रहमान, सुल्तान, अहसान, आशिक़ , अरवाज, उस्मान, नसीम भाई, सादिक भाई, हसन भाई , हम्माद, अहमद, फिरोज खान, मोहसिन खान, अशफ़ाक़ (उरई), जुनेद (उरई), अहमद रज़ा , हाजी नुसरत भाई (महोबा), इंतजार अली, अजीम (एरच), शाहरुख
अब्दुल रहमान, आदिल, अब्दुल वाहिद, अलीम मास्टर, सुल्तान, सादिक, आरिफ खान, मेहताब, सलीम, शफीक खान , हाजी नईम कुरैशी , फैजान, कदीम अहमद, अब्दुल गनी, सिराज, संजय, आशिक, आसिफ, अरबाज, हाजी सलीम, आमिर खान, बबलू भाई, मुमताज मास्टर मौजूद रहे। निजामत(संचालन) हाफिज व कारी आदिल जमील ललितपुर ने किया।

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