झांसी। राजकीय संग्रहालय, झांसी में आयोजित दस दिवसीय चितेरी कला प्रशिक्षण कार्यशाला में आज बच्चों ने बुंदेलखंड के विविध लोकनृत्यों का चित्रण कर क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति को करीब से जाना। कार्यशाला में प्रशिक्षिका नीलम सारंगी ने बच्चों को चितेरी चित्रकला के माध्यम से बुंदेलखंड के प्रमुख लोकनृत्यों की विशेषताओं से परिचित कराया और उन्हें चित्रों में साकार करने की तकनीक सिखाई।
इस दौरान बच्चों ने बधाई नृत्य, बरेदी नृत्य, होली नृत्य, जवारा नृत्य, आदिवासी करमा नृत्य, सैरा नृत्य, रावला, राई नृत्य, कानड़ा नृत्य, ढीमरयाई नृत्य एवं नौरता नृत्य का आकर्षक चित्रण किया। नीलम सारंगी ने बताया कि चितेरी कला बुंदेलखंड की लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं अभिव्यक्त करने का एक प्रभावशाली माध्यम है।
उन्होंने बच्चों को विभिन्न लोकनृत्यों की वेशभूषा, भाव-भंगिमाओं और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी देते हुए चित्रों में उनकी जीवंत प्रस्तुति के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ भाग लेते हुए रंगों और रेखाओं के माध्यम से बुंदेलखंड की लोक संस्कृति को सुंदर अभिव्यक्ति दी।
कार्यशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी को बुंदेलखंड की विलुप्त होती लोक कलाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना तथा उनमें कला और संस्कृति के प्रति रुचि विकसित करना है। बुंदेलखंड में बधाई, बरेदी, जवारा, राई, कानड़ा और सैरा सहित अनेक लोकनृत्य क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
