कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी द्वारा इबोला बीमारी से संबंधित जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति
*–:: प्रेस विज्ञप्ति::–*
*कांगो, युगांडा और दक्षिणी सूडान से आने वाले यात्रियों के संबंध में जारी की गई एडवाइजरी*
*विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषित किया है अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल*
*जनपद में लौटे 2 यात्रियों ने की है संबंधित देश की यात्रा – सीएमओ*
*आईडीएसपी यूनिट द्वारा 21 दिन तक किया जाएगा सर्विलांस*
*झांसी दि0- 22 जून 2026*
इबोला बीमारी से ग्रसित देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो, युगांडा और दक्षिणी सूडान से आने वाले यात्रियों के संबंध में भारत सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी की गई एडवाइजरी के अनुरूप कार्यवाही की जा रही है यह जानकारी देते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी डॉ शिशिर पुरी ने बताया कि प्रभावित देशों से दो यात्री जनपद में वापस लौटे हैं, जिन्हें 21 दिनों तक आईडीएसपी यूनिट द्वारा सर्विलांस निगरानी में रखा गया है। इबोला बीमारी, एक दुर्लभ परंतु अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जिसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50% है। इसके लक्षण आमतौर पर वायरस से संक्रमित होने के 2 दिन से लेकर 21 दिन के भीतर परिलक्षित होते हैं। प्रमुख लक्षण – अचानक तेज बुखार, अत्यधिक थकान, गले में खराश और सिर दर्द, उल्टी, दस्त, त्वचा पर चकत्ते, पेट में दर्द,अंगों का काम बंद होना, नाक, मुंह और मसूड़े से खून आना प्रमुख लक्षण हैं। संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी या मल के सीधे संपर्क में आने से अथवा संक्रमित मरीज के कपड़ों, बिस्तर का उपयोग करने से यह बीमारी फैलती है।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ रमाकांत स्वर्णकार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विगत 17 मई 2026 को कांगो, युगांडा और दक्षिणी सूडान में इबोला बीमारी आउटब्रेक को अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है। जिसके अंतर्गत प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की जांच एयरपोर्ट पर की जा रही है। लक्षण युक्त व्यक्तियों का टेस्ट कराया जा रहा है। बिना लक्षण वाले व्यक्तियों को संबंधित जिले की आईडीएसपी यूनिट के माध्यम से सघन निगरानी किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। वर्तमान में जनपद में 2 यात्री प्रभावित देशों की यात्रा से वापस लौटे हैं तथा प्रतिदिन टेलिफोनिक माध्यम से सर्विलांस किया जा रहा है। यदि इन व्यक्तियों में लक्षण प्रकट होते हैं तो इनका सैंपल लेकर जांच हेतु एनआईवी पुणे भेजा जाएगा।
