जन्मदिवस पर मानवता का अनुपम उपहार: डॉ० संदीप ने मुस्कान के विवाह में निभाई अभिभावक की भूमिका

जन्मदिवस पर मानवता का अनुपम उपहार: डॉ० संदीप ने मुस्कान के विवाह में निभाई अभिभावक की भूमिका

झाँसी। आज के दौर में जहां जन्मदिवस अक्सर केवल उत्सव और औपचारिकताओं तक सीमित होकर रह जाते हैं, वहीं संघर्ष सेवा समिति के संस्थापक डॉ संदीप सरावगी ने अपने जन्मदिवस को सेवा, संवेदना और संस्कार का ऐसा उत्सव बना दिया जिसने उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम और हृदय भावविभोर कर दिया।

विगत कई वर्षों से निरंतर समाज सेवा में समर्पित डॉ संदीप सरावगी निर्धन एवं जरूरतमंद कन्याओं के विवाह में सहयोग कर उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करने का कार्य करते आ रहे हैं। इसी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने प्रेम नगर क्षेत्र निवासी मुस्कान अहिरवार के विवाह में भरपूर सहयोग प्रदान किया।

मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले पिता प्रकाश अहिरवार एवं माता रानी अहिरवार के लिए यह सहयोग किसी आशीर्वाद से कम नहीं था। डॉ० संदीप सरावगी ने अपनी ओर से फुल साइज ट्रॉली बैग, साड़ी, पर्स सहित अनेक उपयोगी उपहार भेंट किए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी वर्षों पुरानी परंपरा को निभाते हुए बिटिया को प्रतिष्ठित ब्यूटी पार्लर कलर्स ब्यूटी पार्लर से सुसज्जित करवाकर स्नेहपूर्वक पैर पखार कर विदा किया। यह दृश्य वहां उपस्थित लोगों के लिए भारतीय संस्कृति, करुणा और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण बन गया।

समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने डॉ संदीप सरावगी की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे लोग विरले ही देखने को मिलते हैं जो किसी गरीब परिवार की बेटी को अपनी बेटी मानकर उसके विवाह की जिम्मेदारी निभाते हों। सेवा, संस्कार और संवेदना का यह अद्भुत संगम समाज के लिए प्रेरणा है।

इस अवसर पर मोनू अहिरवार, विशाल अहिरवार, कोमल, सुलेखा कौशल खरे (लाल), निखिल गुप्ता, आनंद सिंह चौहान, धर्मेंद्र खटीक, प्रमेंद्र सिंह, सिद्धांत गुप्ता, हेमंत यादव, पूजा रायकवार, मोहित यादव, रविंद्र, राज बहादुर सिंह परिहार, अनूप खरे, अनुज प्रताप सिंह, संदीप नामदेव, राजू सेन, राकेश अहिरवार, सुशांत गुप्ता, मुन्ना मास्टर, शुभांशु वर्मा, अंजली विश्वकर्मा, रिया वर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। समारोह में बार-बार यही स्वर सुनाई देता रहा कि “जिस समाज में बेटियों के सम्मान और सहयोग की ऐसी परंपराएं जीवित हों, वहां मानवता कभी मर नहीं सकती।”

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