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जहां प्रभु श्रीराम, वहां गोस्वामी तुलसीदास: प्रो मुकेश पाण्डेय

बुविवि के हिंदी विभाग में
विशेष कार्यक्रम का आयोजन

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मुकेश पाण्डेय ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास भारत की सांस्कृतिक चेतना के अनुपम गौरव बिंदु हैं। पूरे भारत के शिक्षण संस्थानों में श्रीरामचरित मानस उपलब्ध है। जहां भी प्रभु श्रीराम जी की बात होती है, वहां गोस्वामी तुलसीदास विद्यमान दिखते हैं।
उक्त विचार उन्होंने बुधवार को संत श्रेष्ठ गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर हिंदी विभाग में आयोजित विशेष कार्यक्रम में व्यक्त किए।

प्रो पाण्डेय ने कहा कि श्रीरामचरित मानस में जीवन जीने की कला सिखाई गई है। मानस मानवीय मूल्यों और भावों को पुष्ट और विकसित करता है। गोस्वामी तुलसीदासजी ने यह बताया है कि अधिकार से पहले कर्तव्य आता है। स्व से पहले राष्ट्र का हित आता है। जीवन में जितने उतार चढ़ाव रामजी ने देखे उतने कम मानव के जीवन में ही आते हैं। फिर भी उन्होंने आदर्श जीवन जीकर दुनिया को सीख दी। उन्होंने सभी को गोस्वामी तुलसीदास जयंती की बधाई दी।
प्रो पाण्डेय ने विश्वविद्यालय के इकतीसवें दीक्षांत समारोह के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए सभी शिक्षकों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नैक प्लस प्लस ग्रेड से विभूषित हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की विविध उपलब्धियों का भी ब्यौरा सबको दिया। उन्होंने नए विद्यार्थियों को भरोसा दिया कि हर विभाग में संसाधनों के विस्तार का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विधि में बेहतरीन मीडिया लैब की उपलब्धता का भी जिक्र किया।
शुरुआत में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन और गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण किया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष डा पुनीत बिसारिया ने कुलपति समेत सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की व्यापक स्वीकार्यता का उल्लेख भी किया।

साहित्यकार मुख्य वक्ता डा राम शंकर भारती ने भारत में गोस्वामी तुलसीदास की सर्व स्वीकार्यता का उल्लेख किया। मानस और धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध कराने में गीता प्रेस, गोरखपुर की महती भूमिका का भी उल्लेख किया। डा भारती ने कहा कि आज करोड़ों लोग गोस्वामी तुलसीदास जी की महान कृति मानस पर शिक्षण, प्रवचन और उपदेश कर जीविकोपार्जन कर रहे हैं। उन्होंने गोस्वामीजी की जीवन की विषमताओं और विद्रूपताओं का भी वर्णन किया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास को अप्रतिम साधना का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से उनके आदर्शों का अनुसरण करने का आह्वान किया। उन्होंने धीरज,धर्म मित्र अरु नारी दोहे का उदाहरण देते हुए गोस्वामीजी की वैचारिक प्रखरता और गहराई का विस्तार से वर्णन किया। भारती ने कहा कि श्रीरामचरितमानस मानस के जरिए तुलसीदास ने समाज की सभी मानसिक समस्याओं के निराकरण का उपाय दिदया। उन्होंने आदर्श की स्थापना की। उन्होंने कहा कि मानस में हर भाषा के पद मिलेंगे। उनकी रचनाओं में हर बोली के शब्द मिलेंगे। इसीलिए मानस को हर बोली बोलने वाला व्यक्ति समझता है। पांडित्य के कारण बहुत से लोग गोस्वामीजी से द्वेष भी रखते थे लेकिन वे उनकी लोकप्रियता को कम नहीं कर सके। गोस्वामी तुलसीदासजी प्रभु श्रीराम के साथ ही साथ हनुमान जी के भी अनन्य भक्त थे। मंत्रों में शक्ति होती है, इस तथ्य को हम मानस के नियमित पाठन से अनुभव कर सकते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी कृतियों में हर रस,छंद, अलंकार और समासों का प्रयोग मिल जाएगा। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रताप नारायण दुबे रहे।
बाद में यहां कवियों ने काव्यपाठ भी किया। सुमन मिश्रा ने वाणी वंदना से काव्यपाठ की शुरुआत की।
डा मनीषा गिरी ने एक मुक्तक ‘हमारी इस कुटी में वो प्रभु श्रीराम आएंगे’ प्रस्तुत किया। रचनाकार रमा शुक्ला ने रामचरित मानस के रचयिता थे कवि तुलसीदास रचना सुनाई। कवि वैभव दुबे ने विविध रचनाएं सुनाकर समां बांधा।

इस कार्यक्रम में डा श्रीहरि त्रिपाठी, डा नवीन पटेल, डा विपिन प्रसाद, डा सुधा दीक्षित, डा सुनीता वर्मा, डा प्रेमलता, पत्रकारिता संस्थान के समन्वयक डा कौशल त्रिपाठी, डा राघवेन्द्र दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षक उमेश शुक्ल, ललित कला संस्थान की डा सुनीता, डा संतोष कुमार, डा स्वप्ना सक्सेना, शोधार्थी देवेंद्र कुमार समेत अनेक लोग मौजूद रहे। संचालन डा अचला पाण्डेय और डा मनीषा गिरी ने किया।

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