एड. रीतेश मिश्रा “राघवेन्द्र” ने चुनाव प्रक्रिया को नियमविरुद्ध बताते हुए यूपी बार काउंसिल से हस्तक्षेप की मांग की
टहरौली (झाँसी) :- टहरौली बार संघ के प्रस्तावित चुनाव से पहले अधिवक्ताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद ने बार संघ की एकता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले पंद्रह दिनों में दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच दो बार सार्वजनिक विवाद, हाथापाई, सिरफुटौव्वल और जूतमपैजार की घटनाओं ने माहौल को और भी तनावपूर्ण बना दिया है।
एल्डर्स कमेटी ने 30 जून से 15 जुलाई तक का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है, लेकिन इसी बीच युवा अधिवक्ता एड. रीतेश मिश्रा “राघवेन्द्र” ने पूरी प्रक्रिया को नियमविरुद्ध और असंवैधानिक बताते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
एड. रीतेश मिश्रा का आरोप है कि टहरौली बार संघ को पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से विधिवत सम्बद्धता प्राप्त नहीं हुई, इसके बावजूद लगातार चुनाव कराए जाते रहे हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदार पदाधिकारियों ने सम्बद्धता दिलाने की दिशा में कभी गंभीर पहल ही नहीं की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया कुछ खास प्रभावशाली लोगों के नियंत्रण में है तथा अन्य बार संघों के मतदाताओं के नाम कथित रूप से टहरौली की मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता चन्द्रभान सिंह (सी.बी.) तथा युवा अधिवक्ता अमित कुमार शर्मा भी चुनाव प्रक्रिया पर सार्वजनिक आपत्ति जता चुके हैं। बढ़ते विरोध और बार परिसर में लगातार बढ़ते तनाव ने चुनाव को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।
अब निगाहें उत्तर प्रदेश बार काउंसिल पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल इतना तय है कि इस बार टहरौली बार संघ का चुनाव केवल पदाधिकारियों के चयन का नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता और संस्थागत व्यवस्था की भी परीक्षा बन गया है।
