झाँसी | कस्बे में आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों व साहित्यकारों ने काव्यरस का प्रभाव किया| सुशील जैन के आवास पर आयोजित गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई| बतौर और मुख्य अतिथि कवि और शेयर जहीर ललितपुरी रहे| विशिष्ट अतिथि वैभव दुबे रहे |
स्थानी कवि प्रकाश ने देश प्रेम के दिखावे पर कटाक्ष किया| प्रवेश नायक ने इंसान को मानव कहने वाला इंसान, दानव कहने वाला इंसान बताया| वैभव दुबे ने पढ़ा दवा से तबीयत अच्छी रहती है, खुश रहो तो हालात अच्छे रहते हैं| जय ललितपुरी ने मोहब्बत से अगर देखे तो सब अपने से लगते हैं, मुझे दुश्मन के बच्चे भी अपने से लगते हैं, सुनाया| राम शुक्ला सखी ने साहित्य के बदलाव की जो शक्ति निहित है, निर्भय सत्य, स्वतंत्र सर्जन करना ही जनहित है पड़ा |
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दवा से तबीयत अच्छी रहती है, खुश रहो….
