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सरकार खोज-खोजकर पैसे लौटा रही है

*सरकार खोज-खोजकर पैसे लौटा रही है… पीएम मोदी बोले- यह पैसा गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का*

*देश में हमेशा से यह माना गया है कि सरकार को कुछ दे दिया, तो वह ‘वन वे ट्रैफिक’ है और फिर वापस नहीं आता.*

* देश के बैंकों में नागरिकों का लगभग ₹78,000 करोड़ रुपया अनक्लेम्ड पड़ा है.
* इंश्योरेंस कंपनियों के पास करीब ₹14,000 करोड़
* म्युचुअल फंड में ₹3,000 करोड़
* डिविडेंट का ₹9,000 करोड़ अनक्लेम्ड पड़ा है.

*यह पैसा गरीब और मध्यम परिवारों के हैं, जिसके हैं वो तो भूल चुका है… हमारी सरकार देशभर में अब उनको ढूंढ रही है. हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी हुई है.*

■ रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप सम्मिट में कहा कि भारत आत्मविश्वास के पथ पर अग्रसर है और विश्वास का स्तंभ बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के इस दौर में दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है, लेकिन भारत एक अलग स्तर पर दिखाई दे रहा है।
■ पीएम मोदी ने कहा कि जब पूरी दुनिया मंदी झेल रही थी तब भारत आगे बढ़ रहा था। भारत विकास पर पथ पर अग्रसर रहा।
■ पीएम मोदी ने कहा कि बैंकों में नागरिकों का लगभग 78,000 करोड़ रुपया अनक्लेम्ड पड़ा है लेकिन इसका कोई दावेदार नहीं है। अब हम खोज-खोजकर लोगों को पैसे लौटा रहे हैं।
■ पीएम मोदी ने कहा कि हम एक ऐसे मोड़ पर हैं जहां 21वीं सदी का एक हिस्सा बीत चुका है और दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं – वित्तीय संकट, वैश्विक महामारी आदि इन परिस्थितियों ने किसी न किसी रूप में दुनिया को चुनौती दी है। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है, लेकिन इन सबके बीच हमारा भारत एक अलग ही स्तर पर दिखाई दे रहा है। भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। भारत पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
■ पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया में स्लोडाउन की बात होती है, तब भारत ग्रोथ की कहानी लिखता है। जब दुनिया में ट्रस्ट का क्राइसिस दिखता है, तब भारत ट्रस्ट का पिलर बन रहा है। जब दुनिया फ्रेगमेंटेशन की तरफ जा रही है, तब भारत ब्रिज बिल्डर बन रहा है।
■ हिंदू विकास दर शब्द का इस्तेमाल तब किया गया जब भारत 2-3% की विकास दर के लिए संघर्ष कर रहा था। पूरे समाज को अनुत्पादकता और गरीबी का तमगा दे दिया गया। यह साबित करने की कोशिश की गई कि भारत की धीमी प्रगति का कारण हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। क्या तब सांप्रदायिकता नहीं देखी गई थी?
■ प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले की व्यवस्थाओं को अपने ही नागरिकों पर भरोसा नहीं था। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले नागरिकों को अपने दस्तावेज सरकारी अधिकारियों से सत्यापित करवाने पड़ते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने उस कार्यप्रणाली को तोड़ा है। एक नागरिक का स्व-सत्यापित दस्तावेज़ ही उसकी प्रामाणिकता साबित करने के लिए पर्याप्त है।
■ पीएम मोदी ने कहा कि आप भी जानते हैं कि कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में बहुत बड़ी रुकावट है। इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज देश के हर सेक्टर में कुछ न कुछ बेहतर हो रहा है। हमारी गति कॉन्स्टेंट है, हमारी डायरेक्शन कंसिस्टेंट है और हमारा इंटेंट नेशन फर्स्ट का है। शिप बिल्डिंग हो या डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग का क्षेत्र हो। आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।*

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