कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी द्वारा बढ़ते तापमान की दृष्टिगत जारी की गई एडवाइजरी संबंधित

कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी द्वारा बढ़ते तापमान की दृष्टिगत जारी की गई एडवाइजरी संबंधित प

*लू एवं हीट स्ट्रोक से बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी*

*बच्चों, बुजुर्ग, गर्भवती तथा रोगी व्यक्तियों पर अतिरिक्त ध्यान देना जरूरी–सीएमओ*

*शराब, चाय, कॉफी, कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक के स्थान पर लस्सी, नींबू, पानी, छाछ का करें उपयोग– डीएसओ*

*गर्भवती महिला का रखें विशेष ध्यान –पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट*

*झांसी दि०- 27 अप्रैल 2026*

जनपद में दिनों-दिन तापमान में वृद्धि हो रही है। विश्व के 100 सबसे अधिक तापमान वाले शहरों में 95 शहर भारत के हैं, जिनमें से एक झांसी भी है। वर्तमान ग्रीष्म ऋतु में लू के कारण हीट स्ट्रोक की संभावना अधिक होती है। इसके दृष्टिगत स्वास्थ्य विभाग द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी डॉ सुधाकर पांडेय ने स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वर्तमान में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक चल रहा है। अधिक तापमान में गर्भवती महिलाओं को अधिक समय तक रहने से मैटरनल कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अधिक हीट एक्स्पोज़र से बचना चाहिए। साथ ही सभी को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे-
✓मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी हीट वेव और लू की चेतावनी पर ध्यान दें।
✓अधिक से अधिक पानी पिएं, यदि प्यास ना लगी हो तब भी।
✓हल्के रंग के पसीना सोखने वाले हल्के सूती कपड़े पहनें।
✓अगर खुले में काम करते हैं, तो चेहरा हाथ पैरों को गीले कपड़ों से ढंके रहें तथा छाते का प्रयोग करें।
✓काम के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर में चेहरे पर पानी के छींटें मारें।
✓धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग अवश्य करें।
✓यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ ले जाएं।
✓ओआरएस, घर में बने हुए पेय पदार्थ जैसे लस्सी, नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें, जिससे शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके।
✓हीट स्ट्रोक, हीट रैश अथवा घमौरी, शरीर का तापमान 103 डिग्री फारेनहाइट से अधिक होना, हीट क्रैंप के लक्षणों जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, उबकाई, पसीना आना, मूर्छा आदि को पहचानें।
✓यदि मूर्छा या बीमारी अनुभव करते हैं तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लें।
✓जानवरों को छायादार स्थान पर रखें तथा उन्हें पर्याप्त पानी पीने को दें।
✓अपने घरों को ठंडा रखें, पर्दे, दरवाजे आदि का प्रयोग करें। शाम के समय घर तथा कमरों को ठंडा करने हेतु दरवाजा/खिड़की खोल दें।
✓पंखे, गीले कपड़ों का उपयोग करें तथा बारम्बार स्नान करें।
✓कार्य स्थल पर ठंडे पीने के पानी को रखें या उपलब्ध कराएं।
✓कर्मियों को सीधी सूर्य की रोशनी से बचने हेतु सावधान करें।
✓श्रम साध्य कार्यों को ठंडे समय में करने का प्रयास करें।
✓गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्ग तथा रोगी व्यक्तियों पर अतिरिक्त ध्यान देना जरूरी है।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ रमाकांत स्वर्णकार ने एडवाइजरी के अंतर्गत बताया कि कुछ बातों का हमें विशेष ध्यान रखना है, जैसे-
• बच्चों तथा पालतू जानवरों को खड़ी गाड़ियों में ना छोड़ें।
• दोपहर 12 से 3:00 के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें।
• गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़े ना पहनें।
• जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रम साध्य कार्य न करें।
• अधिक गर्मी वाले समय में खाना बनाने से बचें। रसोई वाले स्थान को ठंडा करने के लिए दरवाजे तथा खिड़की खोल दें।
• शराब, चाय, कॉफी, कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक आदि के उपयोग करने से बचें क्योंकि यह शरीर में निर्जलीकरण करता है।

गर्भवती महिलाओं पर हीटवेव के दुष्प्रभाव के बारे में पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ उत्सव राज ने बताया कि गर्भावस्था के आखिरी महीनों में गर्भवती महिला के शरीर को ठंडा रहने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल और शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।गर्मी के महीनों में गर्भपात का रिस्क सबसे ज़्यादा होता है। गर्मियों में शुरुआती गर्भपात का रिस्क बढ़ जाता है।तेज़ गर्मी से डिहाइड्रेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और प्लेसेंटा के विकास पर असर पड़ सकता है।
बचाव के लिए क्या करें -गर्भवती महिला के कमरे का तापमान ठंडा रखें, महिला सुबह 11 से शाम 4 बजे तक घर में रहें,यही समय सबसे गर्म होता है।पानी, ओआरएस,नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन करें। गीला तौलिया गर्दन, कलाई पर रखें। दिन में 2 बार नहाएं।हल्का सुपाच्य खाना खाएं, तला-भुना कम खाएं। दही, खीरा, तरबूज लें।डॉक्टर से ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच हर महीने कराएं। कोई भी गंभीर लक्षण जैसे- पेट में दर्द ऐंठन, तेज सिरदर्द, चक्कर आना, झटके आना, धुंधलापन, घबराहट, तेज बुखार आदि दिखने पर देर न करते हुए तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।

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