देहरादून 12 जून ! इतिहास संकलन समिति द्वारा विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर संगोष्ठी आयोजित की गई ।
समिति के अध्यक्ष विधि प्रोफेसर डॉ.अनिल कुमार दीक्षित नें इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम की बुराई के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को काम की बजाय शिक्षा, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाना बताया।
डॉ. अनिल दीक्षित नें कहा कि, बालश्रम निषेध दिवस यह सन्देश देता है कि बच्चों का स्थान विद्यालय में है, मज़दूरी करने के लिये कार्यस्थल पर नहीं है, भारत देश में गरीबी सहित अशिक्षा औऱ जागरूकता की कमी के कारण लाखो बच्चे शिक्षा से वँचित हो जाते है l समाज क़ो आगे आकर हर बच्चे क़ो सीखने, बढ़ने औऱ अपने सपनो क़ो पूरा करने का अवसर देना होगा
समिति की सचिव मोहिनी उपाध्याय नें कहा कि, बाल श्रम निषेध दिवस की शुरुआत वर्ष 2002 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य बाल श्रम की रोकथाम और इसके मूल कारणों गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी को खत्म करने की दिशा में सरकारों और नागरिकों को एकजुट करना है।
समाज सेवी श्रीमती मीना देवी नें अपने सम्बोधन में कहा कि, भारत में बाल श्रम को रोकने के लिए कानूनी प्रावधान हमारे संविधान के अनुच्छेद 23 के अंतर्गत खतरनाक उद्योगों या कारखानों में बच्चों के रोजगार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना।
भारत सरकार द्वारा बाल श्रम की समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 1986 में बाल श्रम निषेध और नियमन अधिनियम जैसा सख्त कानून संसद में पारित किया गया। नीतिगत प्रयासों के तहत, 1987 में राष्ट्रीय बाल श्रम नीति बनाई गई थी।इस विषय पर अधिक जानकारी और बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक अभियानों के क्रियानव्यन के लिए संयुक्त राष्ट्र समय समय पर दिशा निर्देश देता रहता हैं।
