50वें स्वर्ण जयंती वर्ष में झांसी का ऐतिहासिक दशहरा उत्सव, 400 फीट लंबी सोने की लंका और लेजर शो ने बांधा समां
झांसी। धर्म की विजय, अधर्म के अंत और भगवान श्रीराम के आदर्शों के संदेश के साथ झांसी में दशहरा उत्सव 2026 भव्यता और उल्लास के बीच आयोजित किया गया। बुंदेलखंड दशहरा कमेटी के 50वें स्वर्ण जयंती वर्ष का यह आयोजन धार्मिक आस्था, आधुनिक तकनीक और बुंदेली सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम बना। आसमान में रोशनी बिखेरते लाइट एंड साउंड लेजर शो, रावण, कुंभकरण और मेघनाद के बारूदी पुतलों का विद्युत दहन तथा 400 फीट लंबी और 12 फीट चौड़ी सोने की लंका ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। उत्सव में उमड़े लोगों के बीच भगवान श्रीराम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश गूंजता रहा।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक अशोक जैन रहे। आयोजन को सफल बनाने में संयोजक संजय अग्रवाल, सोमकांत निगम, अनूप सहगल, जीतू सोनी, प्रदीप त्रिपाठी और रामकिशन निरंजन की विशेष भूमिका रही। कमेटी के पदाधिकारियों एवं सहयोगियों के प्रयासों से 50वें स्वर्ण जयंती वर्ष का यह उत्सव भव्य स्वरूप में संपन्न हुआ।
उत्सव के दौरान डॉ. संदीप सरावगी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का तिलक कर पूजन किया। उपस्थित अतिथियों में दिनेश चंद्र, अनुराग शर्मा, रवि शर्मा, बिहारी लाल आर्य, राम निरंजन, अनुराधा शर्मा, दीप नारायण सिंह, प्रदीप जैन, चंद्रपाल यादव, पवन गौतम, कैलाश साहू, अर्जुन सिंह, विनोद अग्रवाल, राजीव राय, लखन गुप्ता, वीरेंद्र राय, सुरेंद्र राय, अजय गोयल, महेश अग्रवाल, संजय पटवारी और संजय झा शामिल रहे।
डॉ. संदीप सरावगी ने अपने वक्तव्य में कहा दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सत्य की असत्य पर, धर्म की अधर्म पर और अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। बुंदेलखंड दशहरा कमेटी द्वारा 50वें स्वर्ण जयंती वर्ष में इतने भव्य स्तर पर आयोजन करना हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन-मूल्यों से जोड़ते हैं। हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहिए।
दशहरा उत्सव 2026 का यह आयोजन धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बना। बुंदेलखंड दशहरा कमेटी के 50वें स्वर्ण जयंती वर्ष पर आयोजित इस भव्य समारोह ने झांसी की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा प्रदान की और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
