खटिकयाना की काली जी की विसर्जन यात्रा बनी आस्था का केंद्र, डॉ. संदीप ने मां के चरणों में किया पुष्पार्चन

खटिकयाना की काली जी की विसर्जन यात्रा बनी आस्था का केंद्र, डॉ. संदीप ने मां के चरणों में किया पुष्पार्चन

झांसी। बुंदेलखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में झांसी के खटिकयाना स्थित काली जी की विसर्जन यात्रा का विशेष स्थान है। नवरात्रि के दौरान कई वर्षों से यहां मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है। प्रतिमा के दर्शन और विसर्जन यात्रा में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस अनूठी परंपरा के चलते यह विसर्जन यात्रा पूरे बुंदेलखंड में विशेष पहचान रखती है।

इस विसर्जन यात्रा की सबसे खास बात यह है कि श्रद्धालु मां काली की भव्य प्रतिमा को अपने कंधों पर लेकर पूरे मार्ग में दौड़ते हुए आगे बढ़ते हैं। खटिकयाना से प्रारंभ होने वाली यह यात्रा भक्तिमय वातावरण, जयकारों और श्रद्धालुओं के उत्साह के बीच लक्ष्मी लाल पर जाकर संपन्न होती है। मां काली के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और समर्पण इस परंपरा को विशिष्ट बनाते हैं।

मां काली की प्रतिमा के विसर्जन के दिन संघर्ष सेवा समिति के संस्थापक डॉ. संदीप सरावगी माता के पंडाल पहुंचे। वहां उन्होंने मां काली के चरणों में पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आस्था और वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

डॉ. संदीप सरावगी विसर्जन यात्रा में भी उपस्थित रहे और श्रद्धालुओं के साथ इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बने। मां काली के जयकारों और भक्तिमय माहौल के बीच संपन्न हुई यह यात्रा एक बार फिर झांसी की समृद्ध धार्मिक विरासत और बुंदेलखंड की अनूठी परंपराओं को प्रदर्शित करती नजर आई।

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