समाज का सबसे बड़ा विकार, परिवारों से खत्म होते संस्कार- डॉ० संदीप सरावगी
*स्वर्णिम भारत संस्था द्वारा एकदिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन* झांसी। प्राचीन काल में संस्कारों की संख्या भी लगभग चालीस थी। जैसे-जैसे समय बदलता गया, व्यस्तता बढती गई जिस कारण संस्कार स्वतः विलुप्त हो गये। जिसे लेकर झोकन बाग स्थित एस. एम टावर संघर्ष सेवा समिति कार्यालय पर संस्थापक समाज से विलुप्त हो रहे संस्कारों को…
